लखनऊ का चिकन और जरदोजी कारोबार भी हुआ लॉक डाउन, लाखों लोग बेरोजगार

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 03, 2020

लखनऊ। कोविड-19 की आफत की बहुत गहरी मार लखनऊ के विश्वविख्यात चिकनकारी और जरी-जरदोजी उद्योग पर भी पड़ी है। लॉकडाउन के कारण जबर्दस्त नुकसान का सामना कर रहे इस पीढ़ियों पुराने कारोबार से जुड़े संगठनों ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है। लखनऊ के करीब डेढ़ लाख परिवारों की रोजी-रोटी चिकनकारी और जरी-जरदोजी के कारोबार से चलती है, मगर लॉकडाउन के कारण कारोबार ठप हो चुका है। बड़े कारोबारी जहां इस पूरे साल का कारोबार डूबने की आशंका से परेशान हैं, वहीं, बड़ी संख्या में कारीगर फ़ाक़ाकशी को मजबूर हैं। लखनऊ चिकन एसोसिएशन के संयोजक सुरेश छाबलानी ने रविवार को को बताया कि लखनऊ चिकनकारी उद्योग नवाबों के वक्त से चला आ रहा कारोबार है। इस वक्त इसका आकार करीब 300 करोड़ रुपये सालाना का है। चिकन की कढ़ाई का काम लखनऊ के आसपास 40—50 किलोमीटर के दायरे में बसे गांवों के लोग करते हैं। इस साल लॉकडाउन के कारण हमारा जबर्दस्त नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि मार्च में होली से पहले हमारे बाजारों में माल बनकर आ जाता है। 

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उधर, जरी-जरदोजी कारीगरों की स्थिति भी दयनीय हो गयी है। इन कारीगरों ने भी राज्य सरकार से राहत की मांग की है। जरदोजी यूनियन के पूर्व उपाध्यक्ष आसिफ अली ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जरदोजी कारीगरों को भी श्रमिकों की तरह एक-एक हजार रुपये की सहायता देने की मांग की है। अली ने बताया कि लखनऊ में करीब 50 हजार परिवारों के लगभग ढाई लाख लोगों की रोजी-रोटी जरी-जरदोजी के काम पर ही टिकी है। मगर, लॉकडाउन के कारण कारोबार ठप है और कारीगर फ़ाक़ाकशी को मजबूर हैं। जरदोजी कारीगर नसीब बानो ने बताया कि लॉकडाउन के कारण काम बंद है और कारीगरों के सामने खाने-पीने का संकट है। सरकार ने हमारी कोई मदद नहीं की है। हम रोजाना जो काम करते थे, उसी से गुजारा होता था। हम चाहते हैं कि सरकार हमारी मदद करे। मालूम हो कि लखनऊ अपने चिकन और जरी—जरदोजी की कढ़ाई वाले कपड़ों के लिये पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां बने कपड़ों की देश के विभिन्न राज्यों उड़ीसा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल और महाराष्ट्र में खासी मांग होती है। इसके अलावा सऊदी अरब, अमेरिका, सिंगापुर समेत अनेक देशों में इनका निर्यात भी होता है।

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