Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता

By अनन्या मिश्रा | Sep 24, 2026

हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। वहीं सभी देवी-देवताओं की पूजा का अपना अलग-अलग महत्व होता है। लेकिन सभी देवी-देवताओं में मां गायत्री को सबसे विशेष माना जाता है, और यही वजह है कि इनको देवताओं की देवी कहा जाता है। देवी गायत्री के जन्म की कहानी थोड़ी अद्भुत और सामान्य देवियों से थोड़ा अलग है। गायत्री देवी आदि शक्ति का स्वरूप है और दिव्य चेतना के रूप में इनका प्राकट्य हुआ था।

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यज्ञ से जुड़ी कथा

एक लोकप्रिय कथा के मुताबिक ब्रह्माजी को एक यज्ञ करना था। लेकिन यज्ञ में ब्रह्माजी की पत्नी सावित्री समय से नहीं पहुंची। वहीं यज्ञ की पूर्णता के लिए एक योग्य स्त्री की जरूरत हुई, तब एक दिव्य शक्ति का प्राकट्य हुआ, जिसको गायत्री कहा गया और ब्रह्मा जी ने देवी गायत्री से विवाह करके उस यज्ञ को पूर्ण किया।

क्यों कहा जाता है 'वेदमाता'

माना जाता है कि सभी ग्रंथों, वेदों और मंत्रों की उत्पत्ति देवी गायत्री से हुई है। मां गायत्री के अंदर चारों वेदों का ज्ञान है, इस कारण उनको वेदमाता भी कहा जाता है। देवी गायत्री की पूजा सिर्फ आम मनुष्य ही नहीं बल्कि देवता भी करते हैं। इसलिए मां गायत्री को सिर्फ देवी नहीं बल्कि ज्ञान, चेतना, विवेक और आध्यात्मिक प्रकाश की शक्ति के रूप में भी देखा जाता है।

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