Tehran से सीधे भिड़ेगा France? सबसे घातक परमाणु विमानवाहक पोत Charles de Gaulle समंदर में उतरा, Rafale ने भरी हुंकार! Middle East War

By रेनू तिवारी | Mar 04, 2026

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने परमाणु संचालित फ्रांसीसी जहाज को बाल्टिक सागर से भूमध्यसागर भेजने का आदेश दिया है। मैक्रों ने कहा कि चार्ल्स डी गॉल की वायुसेना विंग और सहायक फ्रिगेट इसे सुरक्षा प्रदान करेंगे। फ्रांसीसी टीवी पर प्रसारित एक पूर्व-रिकॉर्डेड भाषण में मैक्रों ने कहा कि पिछले कुछ घंटों में पश्चिम एशिया में राफेल लड़ाकू विमान, वायु रक्षा प्रणाली और हवाई रडार प्रणाली तैनात की गई हैं।

साइप्रस और यूएई की सुरक्षा के लिए 'राफेल' तैनात

मैक्रों ने यह भी पुष्टि की कि फ़्रांस ने पिछले कुछ घंटों में राफेल (Rafale) लड़ाकू विमान, हवाई रक्षा प्रणाली और रडार सिस्टम को सक्रिय कर दिया है। सोमवार को साइप्रस स्थित ब्रिटिश एयरबेस पर हुए हमले के बाद, फ़्रांस ने वहां अतिरिक्त हवाई रक्षा संपत्तियां और अपना युद्धपोत 'लैंगडोक' (Languedoc) भेजने का निर्णय लिया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो ने बताया कि अबू धाबी के अल-धफरा बेस पर तैनात राफेल जेट विमानों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उड़ानें शुरू कर दी हैं।

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फ़्रांसीसी बेस पर हुआ हमला

यह कार्रवाई तब और तेज हुई जब रविवार को संयुक्त अरब अमीरात में स्थित एक फ़्रांसीसी सैन्य ठिकाने (हैंगर) पर ईरानी ड्रोन द्वारा हमला किया गया। हालांकि इसमें जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन फ़्रांस ने इसे अपनी संप्रभुता और हितों पर सीधे खतरे के रूप में लिया है।

युद्ध की पृष्ठभूमि

शुरुआत: 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद यह संघर्ष शुरू हुआ। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यह युद्ध कई हफ्तों या उससे अधिक समय तक चल सकता है। ईरान ने जवाब में खाड़ी क्षेत्र के उन देशों को निशाना बनाया है जो अमेरिका के सहयोगी हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग खतरे में पड़ गए हैं।

रणनीतिक महत्व

फ़्रांस का 'चार्ल्स डी गॉल' वर्तमान में उत्तरी अटलांटिक में एक अभ्यास का हिस्सा था, जहाँ से इसे अब युद्ध क्षेत्र की ओर मोड़ा गया है। यह तैनाती दर्शाती है कि यूरोपीय शक्तियां अब इस संघर्ष में केवल दर्शक नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार हैं। 

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