अविस्मरणीय है माधवराव सिंधिया के राजनीतिक किस्से, दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गए थे

By अनुराग गुप्ता | Mar 10, 2022

ग्वालियर के महाराज माधवराव सिंधिया के राजनीतिक किस्से काफी रोचक हैं। उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों भाजपा में हैं लेकिन उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से हुई। पिता माधवराव सिंधिया का झुकाव हमेशा से ही कांग्रेस की तरफ रहा है। इसके चलते उनकी अपनी मां विजयराजे सिंधिया से भी कई मौको पर ठन गई थी। 10 मार्च, 1945 को मुंबई में जन्में माधवराव सिंधिया का विवाह 8 मई, 1966 को माधवी राजे सिंधिया से हुआ था। इस दंपत्ति का एक पुत्र और एक पुत्री थी। पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया को सभी जानते हैं लेकिन पुत्री का नाम चित्रांगदा सिंधिया है।

दो बार मुख्यमंत्री बनते-बनते चूके थे !

माधवराव सिंधिया की दो बार ताजपोशी होते-होते रह गई थी। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि 1989 में चुरहट लॉट्री कांड के समय अर्जुन सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और उन पर इस्तीफा देने का काफी दबाव था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की इच्छा थी कि माधवराव सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाया जाए लेकिन अर्जुन सिंह ने इस्तीफा नहीं दिया था। जिसकी वजह से अर्जुन सिंह को राजीव गांधी की नाराजगी भी झेलनी पड़ी थी।

इसके अलावा उनके जीवन में एक मौका और आया जब माधवराव सिंधिया मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे। साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के चलते मध्य प्रदेश की सुंदरलाल पटवा सरकार को बर्खास्त कर दिया था। उसके बाद 1993 में मध्य प्रदेश में चुनाव हुए और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने सभी खेमों की सुनी और टिकट बांटे। इस चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की। उस वक्त कांग्रेस को 320 में से 174 सीटें मिली थी। चर्चा छिड़ गई कि मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए तब तीन लोगों का नाम काफी ज्यादा चल रहा था। उसमें श्यामा चरण शुक्ल, माधवराव सिंधिया, सुभाष यादव शामिल थे।

माधवराव सिंधिया के लिए यहां तक कहा जाता है दिल्ली में एक विमान स्टैंडबाई पोजिशन पर रखा गया था। क्योंकि कभी भी माधवराव सिंधिया को ताजपोशी के लिए भोपाल जाना पड़ सकता है। लेकिन नरसिम्हा राव ने इन तमाम लोगों को अनदेखा करते हुए अर्जुन सिंह के विश्वासपात्र रहे दिग्विजय सिंह की ताजपोशी करने का ऐलान कर दिया था।

इसे भी पढ़ें: इंदिरा गांधी के कट्टर विरोधी थे भारत के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, जानें कैसी है उनकी शख्सियत

राजनीतिक जीवन

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पहली बार जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ा था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से उनके परिवार का गहरा नाता रहा है। उनकी मां विजया राजे सिंधिया पहले कांग्रेस में ही थीं लेकिन फिर 1969 में तत्कालीन इंदिरा सरकार ने प्रिंसली स्टेट की सारी सुविधाएं छीन ली थी जिसके बाद विजय राजे सिंधिया ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए जनसंघ की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।

माधवराव सिंधिया ने 26 साल की उम्र में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था और इसी के साथ ही उनके जीत का सिलसिला भी शुरू हो गया। आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनावों में भी माधवराव सिंधिया ने गुना से दोबारा जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपनी दावेदारी पेश की थी और सफल भी हुए थे। लेकिन 80 के दशक में उनका झुकाव कांग्रेस की तरफ हो गया था और उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता भी ले ली।

इसे भी पढ़ें: गांधीवादी नेता थे कृष्णकांत, आपातकाल का विरोध करने पर कांग्रेस ने पार्टी से किया था निष्कासित

सबसे दिलचस्प लड़ाई तो साल 1984 के लोकसभा चुनाव में हुई। भाजपा के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से चुनावी मैदान में उतरे। ऐसे में कांग्रेस ने अंतिम समय पर माधवराव सिंधिया के नाम का पासा फेंका और उन्हें ग्वालियर से अपना उम्मीदवार बना दिया था। इस चुनाव में भी माधवराव सिंधिया ने जीत दर्ज की और उन्हें इसका तोहफा भी मिला। कई मंत्रीपद संभाल चुके माधवराव सिंधिया को पहली बार रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। 

सिंधिया और गांधी परिवार की दोस्ती के भी काफी चर्चे हैं। माधवराव सिंधिया के कांग्रेस में शामिल होने के पीछे इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी का हाथ बताया जाता है। राजनीतिक जानकार तो यहां तक कहते हैं कि संजय गांधी की वजह से ही माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद फिर माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी की मित्रता के भी कई किस्से सुनने को मिलते हैं। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में हैं।

- अनुराग गुप्ता

प्रमुख खबरें

Manik Saha ने पूरा किया वादा: Judo Star Asmita Dey को मिला 10 लाख का Check और अगरतला में अपना घर

Commonwealth Fencing Championship: लागोस में Team India का दबदबा, तीसरे दिन 3 Gold समेत जीते 5 पदक

England Test Captain Joe Root ने खिलाड़ियों पर से हटाया Night Curfew, कहा- अपनी Responsibility खुद समझें Team Members

India vs Sri Lanka Test: Washington Sundar के बाहर होने से Team India की बढ़ी मुश्किलें, लगा बड़ा झटका