सबसे कमजोर और बेवकूफ...जंग के बीच ओबामा पर क्यों भड़क गए ट्रंप?

By अभिनय आकाश | May 12, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है और इस बार मामला सिर्फ बयानबाजी तक नहीं रुका है। तेल के दाम ऊपर चढ़ गए हैं। खाड़ी देशों में ड्रोन दिख रहे हैं और दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइन स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस पर तनाव बना हुआ है। इन सबके बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान पिछले 47 साल से अमेरिका और दुनिया को घुमाता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी बयानबाजी तेज करते हुए उस पर 47 वर्षों तक टालमटोल की रणनीति अपनाकर अमेरिका को धोखा देने का आरोप लगाया। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि ओबामा प्रशासन ने 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ी पाबंदियों में ढील और नकद भुगतान के जरिए ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत किया। ट्रंप ने कहा कि ईरान कभी अमेरिका को सबसे बड़ा मूर्ख समझता था, लेकिन अब तेहरान हंस नहीं पाएगा।

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हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान ने अपने जवाब में क्या लिखा था। उधर ईरानी मीडिया के मुताबिक ईरान ने अमेरिका से जंग में हुए नुकसान का मुआवजा मांगा है। साथ ही आर्थिक प्रतिबंध हटाने और स्टेट ऑफ हॉर्मोस पर अपने अधिकार की बात दोहराई है। ईरान ने अपने प्रस्तावों में यह भी कहा कि जंग सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि लेबनान समेत पूरे इलाके में लड़ाई खत्म होनी चाहिए। साथ ही हॉर्मोस से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की भी बात कही गई है। लेकिन ट्रंप ने कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसी बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने हाईली इनरड्ड यूरेनियम का कुछ हिस्सा कम डाइल्यूट करने और बाकी किसी तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। डाइल्यूट करने का मतलब होता है कि किसी गाढ़े चीज को पतला करना। इधर बेंजामिन नेतन याहू ने अमेरिकी मीडिया से कहा कि ईरान के खिलाफ जंग अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि ईरान के पास जमा एनरिचड यूरेनियम हटाना जरूरी है। नेतन्याऊ ने कहा कि सबसे अच्छा रास्ता डिप्लोमेसी है लेकिन जरूरत पड़ी तो कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजस्कियान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम दुश्मन के सामने कभी भी सिर नहीं झुकाएंगे और अगर बातचीत या समझौते की बात होती है तो इसका मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है बल्कि इसका मकसद ईरानी जनता के अधिकारों को बनाए रखना और राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा करना है। इसी बीच अमेरिकी रिपब्लिकन सेनेटर लिंजी ग्राहम ने कहा है कि अब ट्रंप को सैन्य कारवाई पर विचार करना चाहिए। तनाव सिर्फ बयानों तक नहीं है। खाड़ी देशों में ड्रोन एक्टिविटी भी बढ़ गई है।

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