झूठा साबित हो रहा मध्यप्रदेश सरकार का दावा, महाराष्ट्र के सांगली में फंसे मजदूर आत्महत्या करने को मजबूर

By दिनेश शुक्ल | Apr 28, 2020

भोपाल। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार के दूसरे प्रदेशों में फंसे मजदूरों को वापस अपने प्रदेश लाने की घोषणा कागजी ही साबित हो रही है। यही कारण है कि पिछले ढेड़ माह से लॉकडाउन में फंसे मजदूर आत्महत्या करने की तरफ कदम बढाते दिख रहे है। ताजा मामला महाराष्ट्र के सांगली जिले का है, जहाँ किशमिश के गोदाम में काम करने वाले करीब 09 मजदूर आत्महत्या करने की कगार पर है। यह सभी मजदूर शिवपुरी जिले की करेरा तहसील के गाँव दाबरभाट के रहने वाले है। 

प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क से हुए बात में मजदूरी बलबीर कुशवाह ने बताया वह चार महिने पहले यहाँ मजदूरी करने अपने साथीयों के साथ आए थे। महाराष्ट्र के सांगली जिले की तहसील मंकाकोटा के आगल गाँव में किशमिश के गोदाम में मजदूरी करते है। जो की सांगली के करीब 50 किलोमीटर दूर है। कोरोना वायरस के चलते वह यहाँ लॉकडाउन में अपने 09 साथियों के साथ फंस गए है। मजदूर बलबीर कुशवाह ने बताया कि उनकी सहायता गोदाम मालिक भी नहीं कर रहा है और न ही यहाँ खाने-पीने की समुचित व्यवस्था है। चोरी छिपे हम लोग यहां के स्थानीय बाजार से कुछ सामान लाकर जैसे-तैसे दिन काट रहे है और डरे हुए है। साथ ही हमारे कुछ साथी मानसिक रूप से परेशान है और आत्महत्या करने की बात कह रहे है। 

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 अप्रैल 2020 शनिवार को घोषणा करते हुए कहा था कि प्रदेश के बाहर लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को वापस अपने राज्य लाया जायेगा। जिसको लेकर उन्होनें दावा किया था कि उनकी बात महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के मुख्यमंत्रीयों से भी हुई है। जबकि गुजरात से 98 बसों द्वारा 2400 मजदूरों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद वापस अपने प्रदेश रवाने होने की बात भी उन्होनें कही थी। मुख्यमंत्री ने बताया था कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से उनके जिलों में करीब 8 हजार मजदूरों को पहुँचाने की व्यस्था राज्य सरकार ने की है। 

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महाराष्ट्र के सांगली जिले में पिछले ढेड़ माह से फंसे मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के रहने वाले इन मजदूरों ने प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क को एक पत्र भी लिखकर भेजा है। जिसमें उन्होनें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगाई है, कि उन्हें यहाँ से निकाला जाए। मुख्यमंत्री के साथ ही शिवपुरी जिला कलेक्टर को भी इन मजदूरों ने संबोधित करते हुए प्रार्थना की है कि उन्हें जल्दी उनके घर वापस लाने की व्यवस्था की जाए। इस पत्र में उन्होनें अपने सभी मजदूर साथियों के नाम, पिता का नाम और मोबाईल नंबर भी लिखे है। मजदूर बलबीर ने बताया कि उसे डर है कि कही उसके साथी बहुत ही डरे हुए है और इस मुश्किल घड़ी में कोई गलत कदम न उठा ले। 

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