Madhya Pradesh बनेगा औद्योगिक हब! रेल मंत्री Ashwini Vaishnav ने दी ₹48,000 करोड़ की परियोजनाओं और नए 'फ्रेट कॉरिडोर' की सौगात

By रेनू तिवारी | Feb 25, 2026

मध्य प्रदेश के औद्योगिक भविष्य को नई उड़ान देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल से गुजरात तक प्रस्तावित नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) मध्यप्रदेश के विकास के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा। मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रेल मंत्री ने मध्यप्रदेश को दो नई ट्रेनों की सौगात दी, जबकि मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल रेलवे स्टेशन पर इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए।

रेल मंत्री ने मंगलवार को दो ट्रेनों- भोपाल-धनबाद-भोपाल नयी त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन और भोपाल-चोपन-भोपाल साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद अपने संबोधन में कहीं। वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग लिया जबकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल रेलवे स्टेशन से कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला भी उपस्थित थे।

वैष्णव ने कहा कि ट्रेन संख्या 11631/32 भोपाल-धनबाद-भोपाल नयी त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 11633/34 भोपाल-चोपन-भोपाल नयी साप्ताहिक एक्सप्रेस मध्यप्रदेश और आसपास के राज्यों में रेल संपर्क और यात्री सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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एक अधिकारी ने बताया कि रेल यात्रियों की सुविधा और मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश और झारखंड के लिए सीधा संपर्क की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इन नयी ट्रेन सेवाओं को शुरू किया गया है। वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान मध्यप्रदेश में रेलवे का अभूतपूर्व विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान मध्यप्रदेश से सीधे जुड़ने वाली लगभग 48,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षित इंदौर-मनमाड नयी रेलवे लाइन, क्षेत्र के लिए एक ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ है, जिसे 18,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई है। रेल मंत्री ने कहा कि भुसावल-खंडवा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जबकि प्रयागराज-मानिकपुर तीसरी लाइन परियोजना के लिए 1,640 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि रतलाम-नागदा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

वैष्णव ने कहा कि इसके अलावा, इटारसी-नागपुर चौथी रेलवे लाइन परियोजना को 5,400 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण इटारसी-भोपाल-बीना चौथी लाइन कॉरिडोर को 4,300 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। मंत्री ने कहा कि वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी लाइन परियोजना के लिए 8,800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है और साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,200 करोड़ रुपये की लागत से गोंदिया-जबलपुर दोहरीकरण परियोजना को भी मंजूरी दी है।

वैष्णव ने कहा कि माल ढुलाई और परिवहन दक्षता बढ़ाने के लिए, केंद्रीय बजट में ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से गुजरते हुए दानकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक एक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि यह नया फ्रेट कॉरिडोर, मध्यप्रदेश के बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास के लिए एक मजबूत आधार का काम करेगा।

उन्होंने कहा कि 2,052 किलोमीटर लंबा यह पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर मौजूदा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे पश्चिमी बंदरगाहों तक माल की निर्बाध आवाजाही संभव होगी, मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा और औद्योगिक विकास में तेजी आएगी। मंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के माध्यम से मध्यप्रदेश को गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों सहित पश्चिमी तट पर प्रमुख बंदरगाहों से कुशलतापूर्वक जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में बन रहा वधावन बंदरगाह हजीरा और मुंद्रा जैसे मौजूदा बंदरगाहों के साथ, राज्य के लिए बेहतर संपर्क प्रदान करेगा। वैष्णव ने कहा कि इन बंदरगाहों के लिए हाई-स्पीड फ्रेट संपर्क के साथ, मध्यप्रदेश में उद्योगों को निर्यात और आयात दोनों कार्यों में महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा, चाहे वह कंटेनरीकृत कार्गो या थोक वस्तुओं के लिए हो। उन्होंने कहा कि इस बेहतर लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम से राज्य में औद्योगिक विकास में तेजी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री यादव ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि हाल में शुरू की गई ट्रेन सेवा का संचालन शुरू हो गया है, जिससे सिंगरौली के लिए दैनिक रेल संपर्क सुनिश्चित हो गया है। उन्होंने इसे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपहार बताया। उन्होंने कहा कि सिंगरौली के अलावा, ट्रेन से सिंगरौली और धनबाद के बीच यात्रा करने वाले लोगों को भी लाभ होगा, जहां कई निवासी व्यापार, व्यवसाय और रोजगार में लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इस सेवा की शुरुआत से झारखंड और बिहार के साथ सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा, जिससे तीनों राज्यों के निवासियों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि नयी रेल सेवा केवल एक परिवहन सुविधा नहीं है, बल्कि भविष्य के विकास का मार्ग है।

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