महाराष्ट्र विधनसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा, हंगामे के बीच विधेयक पारित नहीं होगा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 16, 2022

नयी दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा है कि वह सदन में हंगामे के बीच विधेयकों को पारित नहीं होने देंगे क्योंकि इसका मतलब जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात होगा। एक साक्षात्कार में नार्वेकर ने शिवसेना में कटु विभाजन के बावजूद राज्य विधानसभा के सुचारू कामकाज को लेकर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने दलील दी कि अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र सदन में व्यवधान ‘‘हल्के’’ हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या शिवसेना में बगावत का 25 जुलाई से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा सत्र पर कोई असर पड़ेगा, इस पर दक्षिण मुंबई के कोलाबा से पहली बार भाजपा के विधायक बने नार्वेकर ने कहा, ‘‘मुझे ऐसा नहीं लगता है।’’ नार्वेकर शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई राज्य विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों की बैठक में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में थे। उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा के हालिया सत्र में लगभग नौ घंटे तक बहस हुई। व्यवधानों में बहुत कम समय बर्बाद हुआ।

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शिवसेना के 39 विधायकों के अलावा, छोटे संगठनों के 10 विधायकों और निर्दलीय विधायकों ने भी शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन किया था, जिसके परिणामस्वरूप ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार को सत्ता से हटना पड़ा। नार्वेकर ने कहा, ‘‘विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में लंबित है। इस पर संविधान के प्रावधानों के तहत फैसला लिया जाएगा। इसका सदन की कार्यवाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’ अध्यक्ष के रूप में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर नार्वेकर ने कहा कि वह सदन में हंगामे के बीच विधेयकों को पारित नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता उचित चर्चा और बहस के बाद विधेयकों को पारित करना सुनिश्चित करना होगा।

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हंगामे में विधेयक पारित करना जनादेश के साथ विश्वासघात होगा। मैं बिना किसी चर्चा के विधेयकों को पारित नहीं होने दूंगा।’’ नार्वेकर ने कहा कि सदस्य अक्सर शिकायत करते हैं कि उन्हें मुद्दों को उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है और वह ये सुनिश्चित करेंगे कि सदस्यों को सदन में बोलने के लिए पर्याप्त समय मिले। नार्वेकर ने कहा कि अगर कोविड-19 महमारी की स्थिति फिर से बिगड़ती है तो वह विधानसभा सत्र को ‘डिजिटल मोड’ में बुलाने की व्यवस्था करने का भी प्रयास करेंगे।

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