Maharashtra में सूखे के बीच बैंकों को निर्देश, कर्ज वसूली के लिए किसानों के घर न जाएं

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 30, 2026

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बैंकों को निर्देश दिया है कि राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए वे किसानों के घर जाकर कर्ज वसूली न करें। उन्होंने अधिकारियों से यह भी पता लगाने को कहा है कि क्या भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ऐसी वसूली प्रक्रिया को स्थगित करने के संबंध में कोई परिपत्र जारी कर सकता है? बावनकुले की अध्यक्षता वाली सूखा राहत मंत्रिमंडलीय उप-समिति की मंगलवार को हुई बैठक में शहरी क्षेत्रों में 10 प्रतिशत जल कटौती लागू करने और बचाए गए पानी को अगले साल जून तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए।

सरकार ने राहत उपायों के तहत फसल ऋण पुनर्गठन, भू-राजस्व में रियायत और बिजली बिल में सब्सिडी समेत कई घोषणाएं की हैं। सरकार ने सूखा प्रबंधन नियमावली-2016 (2020 में अद्यतन) और सूखा प्रबंधन संहिता के तहत ‘ट्रिगर-1’ लागू किया है। यह सूखा ढांचे का पहला चरण है, जिसे 25 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी और 21 दिनों तक लगातार शुष्क अवधि रहने पर लागू किया जाता है।

प्रधान सचिव विनिता वेद सिंघल ने बताया कि संभागीय आयुक्तों से मिली जानकारी के आधार पर राज्य के 265 तालुकों में सूखे जैसी स्थिति सामने आई है। उन्होंने कहा कि ‘ट्रिगर-1’ के मानदंडों के तहत सूखे की स्थिति स्पष्ट हो गई है, जबकि 43 तालुकों ने ‘ट्रिगर-2’ के मानदंड पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि इन 43 तालुकों और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) प्रक्रियागत देरी के बिना जारी किया जाना चाहिए।

‘ट्रिगर-2’ सूखे की गंभीरता और वास्तविक प्रभाव का आकलन करने वाला दूसरा चरण है, जिसमें फसल क्षेत्र, फसल की स्थिति एवं नुकसान, भूजल स्तर और प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण जैसे संकेतकों का मूल्यांकन किया जाता है। बावनकुले ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संकट की इस घड़ी में किसानों को फसल ऋण की वसूली के लिए परेशान नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि बैंक और ऋण समितियां किसानों से वसूली के लिए संपर्क न करें।

उन्होंने कहा कि तालाठी, ग्राम सेवक और कृषि अधिकारियों समेत सरकारी मशीनरी अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर स्थिति की निगरानी करे। सिंघल ने कहा कि हालांकि 96 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन फसलों की वास्तविक स्थिति चिंता का विषय है। उन्होंने फसल नुकसान का सर्वेक्षण कर 25 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने को कहा।

बावनकुले ने कहा कि किसानों को हरसंभव सहायता दी जानी चाहिए और फसल नुकसान आकलन रिपोर्ट पर किसानों के हस्ताक्षर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चारे और पानी की कमी से निपटने तथा बांधों और झीलों में जल भंडार के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की जरूरत है। सीमेंट सड़कों जैसे पानी की अधिक खपत वाले कार्यों से बचने और बड़े निर्माण कार्यों पर रोक लगाने का भी सुझाव दिया गया।

विज्ञप्ति में कहा गया कि पेयजल और पशुओं के चारे को प्राथमिकता दी जाएगी। गांवों के तालाब और परकोलेशन टैंक पेयजल के लिए आरक्षित रखे जाएंगे। जल आवंटन में पेयजल, चारा फसलों और रबी फसलों जैसे गेहूं एवं गन्ने को प्राथमिकता दी जाएगी।

उप-समिति ने प्रशासन को रबी मौसम की तैयारी करने और अगले 10 महीने के लिए पानी एवं चारे की जरूरतों की व्यापक योजना बनाने का निर्देश दिया। बावनकुले ने मुख्य सचिव को तीन विभागों के सचिवों की समिति गठित करने को कहा, जो अन्य राज्यों में चारा प्रबंधन के उपायों का अध्ययन कर महाराष्ट्र के लिए उपयुक्त चारा योजना तैयार करेगी।

प्रमुख खबरें

ECI विवाद पर Omar Abdullah का तंज, CEC Gyanesh Kumar को Bharat Ratna मिलना चाहिए

BSE में BNP Paribas और Goldman Sachs ने बेची 2186 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी

Election Commission ने फॉर्म-6 से हटाई SIR घोषणा, जानिए किन राज्यों के लिए लागू हुआ नियम

Delhi Riots: Umar Khalid और Sharjeel Imam को तीसरी बार झटका, High Court ने खारिज की जमानत