महाराष्ट्र राजनीतिक संकट: शिंदे गुट के विधायक ने बताया, आखिर क्यों हुई शिवसेना में बगावत

By अंकित सिंह | Jun 25, 2022

महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट के बीच वार-पलटवार का दौर लगातार जारी है। मुंबई से शिवसेना आलाकमान अपने बागी विधायकों को सख्त लहजे में लौट आने की चेतावनी भी दे रहा है। इसके साथ ही साथ उनसे आग्रह भी किया जा रहा है। दूसरी और शिवसेना के बागी विधायक के अभी भी यह दावा कर रहे हैं कि वे पार्टी से अलग नहीं हुए हैं लेकिन उनकी मांग कुछ और है। विधायकों की ओर से साफ तौर पर कहा जा रहा है कि हम अपने प्राकृतिक गठबंधन की मांग कर रहे हैं। लेकिन उद्धव ठाकरे लगातार इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। एकनाथ शिंदे गुट अभी भी शिवसेना के 38 विधायकों के साथ गुवाहाटी में डाटा हुआ है। खबर तो यह भी है कि अभी भी यह गुट कुछ दिन और गुवाहाटी में रुक सकता है क्योंकि अब 30 तारीख तक होटल की बुकिंग बढ़ा दी गई है।

 

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स्वाभाविक गठबंधन की मांग 

इन सबके बीच एकनाथ शिंदे गुट के एक विधायक ने आज एक बार फिर से अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उद्धव ठाकरे को लेकर बड़ी बात कही है। परोला से बागी विधायक चिमनराव पाटिल ने कहा कि हम परंपरागत रूप से एनसीपी और कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी हैं, वे निर्वाचन क्षेत्रों में हमारे प्राथमिक चुनौती हैं। हमने सीएम उद्धव ठाकरे से अनुरोध किया कि प्राकृतिक गठबंधन किया जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा कि चूंकि सीएम की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, इसलिए हमारे नेता एकनाथ शिंदे ने स्टैंड लिया क्योंकि शिवसेना का हर कार्यकर्ता स्वाभाविक गठबंधन चाहता है। शिवसेना के दो-तिहाई से अधिक विधायकों और 10 निर्दलीय विधायकों द्वारा विद्रोह का समर्थन किया जा रहा है।

 

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हमने शिवसेना नहीं छोड़ी है

इससे पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में गुवाहाटी में डेरा डाले हुए शिवसेना के बागी विधायकों ने कहा कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है, लेकिन संकेत दिया कि वे महाराष्ट्र विधानसभा में ‘शिवसेना (बालासाहेब)’ नाम से एक अलग समूह के रूप में काम करेंगे। समूह के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने कहा कि उनके पास दो तिहाई बहुमत है और इसलिए शिंदे शिवसेना विधायक दल के नेता बने हुए हैं। उन्होंने दोहराया कि पार्टी प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ दरार का कारण 2019 में भाजपा के साथ गठबंधन समाप्त करने तथा राकांपा और कांग्रेस से हाथ मिलाने का उनका निर्णय था। केसरकर ने कहा कि उन्होंने शिवसेना नहीं छोड़ी है, लेकिन अपने समूह का नाम शिवसेना (बालासाहेब) रखा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ 16 या 17 लोग 55 विधायकों के समूह के नेता को नहीं बदल सकते हैं और शिवसेना का बागी गुट शिंदे को शिवसेना समूह के नेता के रूप में बदलने के महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल के आदेश को अदालत में चुनौती देगा। 

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