By अनन्या मिश्रा | Feb 12, 2026
हर साल फाल्गुन माह में महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती मनाई जाती है। महर्षि दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। वह 19वीं सदी के समय के बहुत बड़े सामाजिक सुधारक और धार्मिक नेता थे। उन्होंने उस दौरान समाज में फैली कुरीतियों जैसे धार्मिक अंधविश्वास, सती प्रथा और जातिवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। आज ही के दिन यानी की 12 फरवरी को महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म हुआ था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को हुआ था। वह एक महान समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक थे। दयानंद सरस्वती के गुरु स्वामी विरजानन्द स्वामी विरजानन्द थे।
हर साल महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती इसलिए मनाई जाती है, क्योंकि वह एक महान समाज सुधारक, आर्य समाज के संस्थापक और वेदों के पुनरुद्धार के प्रवर्तक थे। दयानंद की शिक्षाएं और कार्य भारतीय समाज के लिए प्रेरणा से स्त्रोत हैं। उन्होंने 'वेद ही हमारा धर्म है' की भावना को फैलाया था। महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज को वेदों की ओर लौटने और सच्चे ज्ञान की तरफ जाने का मार्ग दिखाया। उन्होंने समाज में फैली तमाम कुरीतियों जैसे मूर्तिपूजा, सती प्रथा, जातिवाद, बाल विवाह, छुआछूत और अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष किया। महर्षि दयानंद ने स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कार्य किए।
यह दिन महर्षि दयानंद सरस्वती के वैदिक पुनरुत्थान, सामाजिक सुधारों और नैतिक शिक्षाओं को याद करने का है। महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रेरणा से आर्य समाज का गठन हुआ। इसमें समाज सेवा, शिक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे कामों को बढ़ावा दिया।
वहीं 01 अक्तूबर 1883 को स्वामी दयानंद सरस्वती की राजस्थान के माउंट आबू में मृत्यु हो गई थी। यह वही स्थान है, जहां पर दयानंद सरस्वती ने अपने जीवन के अंतिम समय में चिंतन और तपस्या किया था।