महात्मा गांधी ने अपना तन, मन और धन राष्ट्र के हित में समर्पित कर दिया

By अली खान | Oct 02, 2020

अहिंसा के प्रबल समर्थक, शांति के अग्रदूत‌ और‌ भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचारों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। मौजूदा वक्त में बढ़ती भूखमरी, बेरोजगारी, विश्व हिंसा, वैश्विक आर्थिक मंदी और आपसी वैमनस्यता के बीच गांधी जी के विचारों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। दुनिया में समरसता, सद्भाव, अहिंसा और सत्य की बात करने वाले गांधी जी के जन्मदिवस 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। गांधी जी ने अपने विचारों से न केवल भारतीयों को प्रभावित किया बल्कि समूचे विश्व को प्रेरित भी किया।

महात्मा गांधी जी ने अपना तन, मन और धन राष्ट्र के हित में समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी जी ने 200 वर्षों की दीर्घकालीन पराधीनता के पश्चात भारत को स्वाधीनता के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया।‌ गांधी जी ने नस्लभेद मिटाने के साथ-साथ हरिजन हितार्थ और हिन्दू-मुस्लिम में एकता स्थापित करने के कई प्रयास भी किए। गांधी जी ने चंपारण से स्वाधीनता की बिगुल बजाई और खिलाफत में हिंदू-मुस्लिम की एकता की अद्भुत मिसाल पेश की। उनकी अगुवाई में उद्-घोष 'करो या मरो' ने देश को 15 अगस्त 1947 को आजादी दिलाई।

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गांधी जी ने शिक्षा के संदर्भ में एक सिद्धांत प्रतिपादित किया। वह सिद्धांत बुनियादी शिक्षा को लेकर था। गांधी जी का बुनियादी शिक्षा का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस समय था। गांधी जी अपने बुनियादी शिक्षा के उद्देश्यों में बच्चे का सर्वांगीण विकास, अच्छे चरित्र का निर्माण, आदर्श नागरिक बनाने के साथ-साथ उसे स्वावलंबी बनाने की बात करते थे। यद्यपि हम भारतीय गांधी जी के स्वाधीनता संग्राम में योगदान को को कभी नकार नहीं सकते। लेकिन आज देश में गांधी जी के विचारों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। गांधी जी के विचारों को ताक पर रखकर कई अनुचित प्रकृति के कदम उठाए जा रहे हैं। जो वाकई बेहद चिंताजनक है। अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी के बारे में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने बिलकुल सटीक कहा था कि भविष्य की पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करने में मुश्किल होगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई व्यक्ति भी कभी धरती पर आया था।

- अली खान

स्वतंत्र लेखक एवं स्तंभकार

जैसलमेर, राजस्थान

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