By अभिनय आकाश | Jul 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के सामने नए मामलों का ज़िक्र करते समय लाइव वीडियो फ़ीड की आवाज़ बंद (म्यूट) रखी जाए। इससे आम लोग और मीडिया वकील की अर्जेंट लिस्टिंग की अपील और कोर्ट की ज़बानी प्रतिक्रियाएँ नहीं सुन पाएँगे। यह फ़ैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश की उस टिप्पणी के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि ज़रूरी मामलों का ज़िक्र करना न्यायिक कार्यवाही के बजाय एक "प्रशासनिक" काम है और इसलिए इसकी रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए। हालिया निर्देश इस बात को सुनिश्चित करता है कि नए मामलों के ज़िक्र (मेंशनिंग) के दौरान होने वाली बातचीत अब कोर्ट की लाइवस्ट्रीम पर सुनाई न दे।
नई सुनवाई के दौरान ऑडियो म्यूट करके, सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही के इस चरण तक जनता की पहुंच को प्रभावी रूप से सीमित कर दिया है, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग फीड जारी रहती है। इस कदम से मामलों की सूची बनाने की प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान हुई मौखिक बातचीत के प्रसार को रोकने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट की वर्चुअल कार्यवाही तक पहुंच के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जिससे न्यायिक सुनवाई और किसी मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के प्रशासनिक निर्णय के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित होता है। हालांकि अदालत ने इस निर्देश के साथ कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है, लेकिन यह कदम मुख्य न्यायाधीश की उस पूर्व टिप्पणी के बाद उठाया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस तरह की प्रशासनिक बातचीत को न्यायिक कार्यवाही के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।