बड़ी तैयारी शुरू...तनाव के बीच बॉर्डर पर पहुंचे सेना प्रमुख ने किया बड़ा धमाका

By अभिनय आकाश | Oct 28, 2026

जिस वक्त भारत चीन बॉर्डर पर तनाव जैसा माहौल बना हुआ है। दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं। भारतीय सैनिक चीन को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं। ठीक उसी दौरान थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एलएसी पर पहुंचकर बड़ा धमाका कर दिया। जिसने चीन में खलबली मचा दी है। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सैनिकों से मिलकर क्या कहा और बॉर्डर से चीन को क्या बड़ा संदेश दिया? दरअसल पिछले कुछ दिनों से चीन एलएसी पर तनाव बढ़ाने वाली हरकतें कर रहा है। लेकिन भारत भी उसे तगड़ा जवाब देते हुए दिखाई दे रहा है। जैसे अरुणाचल प्रदेश के बॉर्डर पर चीन के सैनिकों ने आंख दिखाने की कोशिश की तो आईटीबीपी के जवानों ने उनकी हेकड़ी निकाल दी है। जिसके बाद से ही चीन शांति की बातें करते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि भारत अच्छे से जानता है कि चीन कितना दगाबाज मुल्क है। इसीलिए भारत ने बॉर्डर पर अपनी मजबूती बढ़ानी शुरू कर दी है और इसका बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब भारतीय सेना प्रमुख चीन बॉर्डर पर पहुंच गए। 

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सेना प्रमुख की ये सैनिकों के साथ तस्वीरें और बातें सुनकर जरूर चीन की नींद उड़ जाएगी क्योंकि उन्होंने सीधे सैनिकों के बीच पहुंचकर जो बातें कही वो अपने आप में महत्वपूर्ण है। सेना प्रमुख ने बॉर्डर पर पहुंचकर चीन को बता दिया कि अगर कोई भी मांगत थी तो उसका तगड़ा जवाब दिया जाएगा। तो वहीं सेना प्रमुख ने बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक के व्यापक इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं में लगातार सुधार और हर समय सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। जनरल धीरज सेठ ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा के लिए सैनिकों की तैयारी और उनकी क्षमता को लगातार मजबूत बनाए रखना जरूरी है। दरअसल इससे पहले जुलाई में भी सेना प्रमुख ने पूर्वोत्तर के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया था। भारत की उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाओं पर सुरक्षा सिर्फ सैनिकों की तैनाती तक सीमित नहीं है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, मौसम सड़कें और दुर्गम पहाड़ियां भी सैन्य तैयारी में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इसलिए जब सेना प्रमुख सीमवर्ती क्षेत्रों का दौरा करते हैं तो इसका मकसद सिर्फ जवानों से मुलाकात करना नहीं होता। ऐसे दौरों का एक अहम पहलू है जवानों का मनोबल बढ़ाना। जब सेना का शीर्ष नेतृत्व अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों से सीधे बातचीत करता है तो उन्हें अपनी चुनौतियां और जरूरतें नेतृत्व तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

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