By अभिनय आकाश | Sep 02, 2026
ब्रैडफोर्ड में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर 60 से ज़्यादा दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी समुदाय के लोगों ने पाकिस्तान की सेना और राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना और तेज़ कर दी है। उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आम नागरिकों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इन प्रदर्शनों का मकसद पूरे इलाके में बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्गों की हत्या और उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार को उजागर करना है। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना पाकिस्तानी जनता के बजाय पाकिस्तान के सत्ताधारी जनरलों और वहां की सरकारों के खिलाफ है।
प्रदर्शनकारियों ने कश्मीर पर पाकिस्तान के दावे को भी खारिज कर दिया और कहा कि कश्मीरी लोगों को अपना राजनीतिक भविष्य खुद तय करना चाहिए। वक्ता ने कहा, "कश्मीर कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा।"
एक अन्य वक्ता ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अपनी ही आबादी पर डर और दमन थोप रहा है, जबकि जिसे प्रदर्शनकारियों ने "कब्जे वाला कश्मीर" (occupied Kashmir) कहा, वहां के लोगों के खिलाफ और भी कठोर कदम उठा रहा है। वक्ता ने कहा, "पाकिस्तान के लोगों पर आपने जो जुल्म किए हैं, उन्होंने उन्हें खामोश कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुनियादी अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता की मांग करने के कारण कश्मीरियों को "अभूतपूर्व दमन और बर्बरता" का सामना करना पड़ा है।
वक्ताओं ने PoJK में आम नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग की खबरों की निंदा करते हुए कहा आपने हमारी माताओं, बहनों या बच्चों को भी नहीं बख्शा।" उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों पर असहमति की आवाज दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया; इसके लिए इंटरनेट एक्सेस पर रोक लगाई गई और कथित तौर पर सेवाओं को बहाल करने से पहले निवासियों से हलफनामे (affidavits) पर हस्ताक्षर करने को कहा गया।