कोविड-19 टीकों की परस्पर मान्यता के जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान बनाई जानी चाहिए: मोदी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 23, 2021

 कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अपने भू-भाग में अन्य देशों के नागरिकों को प्रवेश देने के लिए विभिन्न देशों द्वारा अपनाए जा रहे अलग-अलग नियमों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि टीकों के प्रमाणपत्र को पारस्परिक मान्यता देकर अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाया जाना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की ओर से आयोजित कोविड-19 वैश्विक सम्मेलन में एक वीडियो संदेश के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत टीकों के उत्पादन की वर्तमान क्षमता को बढ़ा रहा है और इसके बाद ही वह अन्य देशों को टीकों की आपूर्ति बहाल करेगा।

 

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उन्होंने कहा कि इसके लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को खुला रखे जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस महामारी के आर्थिक प्रभावों के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके लिए टीकों के प्रमाणपत्र को पारस्परिक मान्यता देने के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाने की जरूरत है।’’

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे दिन आया, जब ब्रिटिश सरकार ने भारत निर्मित ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका कोविड-19 टीके कोविशील्ड को अपने अद्यतन अंतरराष्ट्रीय यात्रा परामर्श में शामिल कर लिया है, लेकिन भारत को उन 18 देशों की सूची से बाहर रखा है, जिनके यहां के टीकों को उसने (ब्रिटेन ने) स्वीकृत किया है। इसका मतलब है कि भारतीयों को गैर-टीकाकरण वाले यात्रियों के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

भारत में टीका लगवाने वाले लोगों को भी ब्रिटेन पहुंचने पर पृथक-वास में रहना होगा क्योंकि नए नियम चार अक्टूबर से प्रभावी होंगे। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने सोमवार को नया यात्रा परामर्श जारी किया, जिसके तहत पूर्ण टीकाकरण करा चुके व्यक्ति को नवंबर महीने से प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी नागरिकों को अपने यहां प्रवेश पर रोक लगा रखी थी। प्रधानमंत्री ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत मौजूदा टीकों की उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही नये टीके विकसित होंगे, हम वर्तमान उत्पादन क्षमता को तेज करेंगे। जैसे ही उत्पादन बढ़ेगा, हम दूसरों को टीकों की आपूर्ति बहाल करेंगे। इसके लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को खुला रखा जाना अनिवार्य है।’’

कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद भारत ने टीकों का निर्यात अप्रैल में बंद कर दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘अपने क्वाड साझेदारों के साथ हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत की टीका उत्पादन क्षमता को बढ़ा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में कोविड टीकों, नैदानिक उपकरण एवं औषधियों के लिए एक ‘ट्रिप्स’ (बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार से जुड़े पहलुओं पर समझौता) छूट का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि यह महामारी का मुकाला करने में तेजी से मजबूती प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा से मानवता को एक परिवार के रूप में देखा है और देश के दवा उद्योग ने किफायती नैदानिक उपकरण, दवाइयां, चिकित्सकीय उपकरण और पीपीई किट का उत्पादन किया है। उन्होंने कहा कि इससे कई विकासशील देशों को सस्ते विकल्प भी मिले हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान जारी है और हाल ही में एक दिन में (कोविड-19 रोधी टीके की) करीब ढाई करोड़ खुराक दी गई। उन्होंने कहा कि अब तक भारत में 80 करोड़ खुराक दी जा चुकी है और 20 करोड़ से अधिक लोगों का पूरी तरह टीकाकरण हो चुका है।

 

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प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल की शुरुआत में भारत ने 95 अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षकों को टीके की खुराक उपलब्ध कराई। मोदी ने कहा, ‘‘हमने दवाइयां और मेडिकल आपूर्ति 150 से अधिक देशों को की है।’’

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान भारत को विश्व के अन्य देशों की ओर से की गई मदद के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब हम दूसरी लहर के दौरान मुश्किल दौर से गुजर रहे थे तो एक परिवार की तरह दुनिया भारत के साथ खड़ी रही।’’

भारत ने सोमवार को कहा था कि वह अगले महीने ‘वैक्सीन मैत्री’ कार्यक्रम के तहत और वैश्विक पहल ‘कोवैक्स’ को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कोविड-19 टीकों का निर्यात फिर से शुरू करेगा, लेकिन देश के लोगों का टीकाकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

सरकार को अक्टूबर में कोविड​​-19 टीकों की 30 करोड़ से अधिक खुराक और अगले तीन महीनों में 100 करोड़ से अधिक खुराक मिलेगी। देश में कोविड-19 टीके की अब तक 83 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है और 10 करोड़ खुराक महज 11 दिनों में दी गई।

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