Prabhasakshi NewsRoom: Putin को Toyota Fortuner में यात्रा करवा कर Modi ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को तगड़ा जवाब दे दिया

By नीरज कुमार दुबे | Dec 05, 2025

दिल्ली में हाल के धमाके के बाद विदेशी मीडिया के कुछ वर्गों ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया मानो दिल्ली में बड़े स्तर के सुरक्षा जोखिम मौजूद हों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की यात्रा कठिन हो सकती है। लेकिन इन सभी आशंकाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक प्रतीकात्मक और साहसिक कदम से ध्वस्त कर दिया। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को साधारण टोयोटा फॉर्च्यूनर में एयरपोर्ट से अपने निवास तक ले जाकर दुनिया को यह संदेश दिया कि दिल्ली और भारत पूर्णतः सुरक्षित हैं और यहां किसी भी आगंतुक के लिए कोई खतरा नहीं है। यह कदम सुरक्षा पर उठ रहे अंतरराष्ट्रीय सवालों का सबसे प्रभावी उत्तर बन गया।

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हम आपको बता दें कि राष्ट्रपति पुतिन आमतौर पर अपनी बख्तरबंद ऑरस सेनट में चलते हैं, जिसे “चलता-फिरता बंकर” कहा जाता है। गुरुवार को यह सेनट वाहन आपातकालीन स्थिति के लिए साथ जरूर रखा गया, लेकिन पुतिन ने स्वयं मोदी के साथ फॉर्च्यूनर में यात्रा की। यह भारत में उनकी सुरक्षा पर पूर्ण विश्वास का प्रतीक था। दोनों नेता एयरपोर्ट से निकलते ही सीधे 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुँचे, जिसे भारत–रूस मित्रता के प्रतीकों से सजाया गया था।

उधर, पुतिन की यात्रा के लिए दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (FSO) और भारत की एसपीजी, एनएसजी, QRT और SWAT इकाइयों ने मिलकर पाँच स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है। होटलों की छतों पर AI-सक्षम स्नाइपर, एंटी ड्रोन सिस्टम और विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। पुतिन का विशेष विमान Ilyushin IL-96-300PU, जिसे “फ्लाइंग क्रेमलिन” कहा जाता है, वह मिसाइल रोधी तकनीक और बैकअप विमानों के साथ दिल्ली पहुँचा है।

देखा जाये तो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पुतिन को फॉर्च्यूनर में साथ ले जाना सिर्फ एक सादगी भरा कूटनीतिक दृश्य नहीं था बल्कि यह भारत की सुरक्षा, आत्मविश्वास और स्थिरता का वैश्विक संदेश था। विदेशी मीडिया के संशयों का यह सबसे प्रभावी जवाब था। इसके अलावा यह एक राजनीतिक संदेश भी था। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में औपचारिकता और सुरक्षा सर्वोपरि होती है, तब दोनों नेताओं ने यह दर्शाया कि व्यक्तिगत विश्वास और आपसी आत्मीयता भी कूटनीति का हिस्सा है।

बहरहाल, फॉर्च्यूनर की यह छोटी-सी यात्रा शायद आने वाले वर्षों में भारत-रूस संबंधों के लिए एक प्रतीकात्मक मोड़ बन सकती है, जहाँ रिश्ते केवल करारों या रक्षा सौदों तक सीमित नहीं, बल्कि दो नेताओं के भरोसे और समझदारी पर आधारित हों। इसके साथ ही यह दृश्य कूटनीति के शिष्टाचार से आगे जाकर विश्व मंच पर “भारतीय आत्मविश्वास और स्वतंत्रता” का प्रदर्शन भी था।

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