अपने बलबूते ममता ने बचाया पश्चिम बंगाल में टीएमसी का गढ़

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 05, 2024

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए एक बार फिर ममता बनर्जी का जादू काम आया और पार्टी ने राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 29 पर जीत हासिल की। इतना ही नहीं टीएमसी ने भाजपा को पिछली बार की 18 सीटों से पीछे धकेल कर उसे 12 तक ही सीमित कर दिया। भाजपा को 39 प्रतिशत से भी कम वोट मिले। हालांकि दीदी ने जीत का श्रेय राज्य की जनता को दिया और चुनावी नतीजों को बंगाल के विरोधियों को जनता का ठेंगा करार दिया। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि ममता का राजनीतिक करिश्मा, सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ने वाली जुझारू नेता की उनकी छवि और भाजपा के प्रति उनका उग्र विरोध उनके समर्थकों के विश्वास को बनाए रखने में कहीं अधिक काम आया। 

उन्होंने इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया कि टीएमसी प्रमुख के कई नेता जेल में हैं, केंद्रीय जांच एजेंसियां ​​उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी सहित कई अन्य लोगों पर शिकंजा कस रही हैं और केंद्रीय कोष पर प्रतिबंध लगा हुआ है, जिससे राज्य की कल्याणकारी योजनाएं कथित तौर पर पटरी से उतर गई हैं। इस प्रक्रिया में उन्होंने खुले तौर पर पीड़ित कार्ड खेला और बाहरी लोगों से राज्य के लोगों की रक्षक के रूप में अपनी छवि को बढ़ावा दिया। लोकसभा चुनाव 2014 बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे अच्छा समय था जब उन्होंने राज्य की 42 लोकसभा सीट में से 34 पर कब्जा किया था। 

उन्हें शायद 2021 के राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा के जबरदस्त प्रभाव का सफलतापूर्वक प्रतिरोध करने के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाएगा, क्योंकि इस चुनाव में भाजपा ने अभूतपूर्व प्रचार अभियान चलाकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। बनर्जी के अथक अभियान (जिसमें से अधिकांश उन्होंने नंदीग्राम में अपने प्रचार अभियान के दौरान कथित तौर पर लगी चोट के कारण व्हीलचेयर से ही संचालित किया था) और पार्टी की चुनाव सलाहकार एजेंसी द्वारा तैयार की गई चुनावी रणनीतियों के कारण टीएमसी 215 सीटों पर पहुंच गई और भाजपा को उसने 77 सीटों तक सीमित कर दिया। 

इसे भी पढ़ें: Naveen Patnaik ने ओडिशा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया

हालांकि भाजपा अपनी पिछली तीन सीटों की संख्या से कई गुना अधिक सीटें हासिल करने में सफल रही और उसने विधानसभा में एकमात्र विपक्ष के रूप में खुद को स्थापित किया, लेकिन राज्य में भाजपा की राजनीतिक आकांक्षाओं को करारा झटका देने का श्रेय बनर्जी और अभिषेक को दिया गया। लेकिन मौजूदा लोकसभा चुनाव ममता द्वारा अपने बलबूते पर पश्चिम बंगाल में अपने गढ़ को बचाने के लिए याद किया जाएगा।

प्रमुख खबरें

खून-पानी साथ नहीं, फिर भी Pभारत ने निभाया पड़ोसी धर्म, दुश्मन को बचाने के लिए भेज दिया फ्लड अलर्ट

Hyundai Car खरीदने का Plan है? अब जेब होगी ढीली, कंपनी ने ₹12,800 तक बढ़ाए दाम

Modi Cabinet ने राशन वितरण प्रणाली में बड़े बदलाव को दी मंजूरी, SARTHAK PDS Scheme के जरिये देशवासियों को मिलेगा मजबूत खाद्य सुरक्षा कवच

T20 World Cup से पहले Team India की अग्निपरीक्षा, England में लय पाने उतरेगी Harmanpreet की सेना