पाकिस्तान से बात हो... PM मोदी-शहबाज को चिट्ठी लिखने वालों में मणिशंकर अय्यर और हुमायूं कबीर

By अभिनय आकाश | Jul 01, 2026

सीमा पार आतंकवाद को लेकर जारी तनाव के बावजूद, भारत और पाकिस्तान से बातचीत फिर से शुरू करने और राजनयिक संबंध बहाल करने की अपील करते हुए एक खुले पत्र पर कई प्रमुख भारतीय नेताओं और जानी-मानी हस्तियों के हस्ताक्षर करने के बाद एक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती, RJD सांसद प्रो. मनोज झा, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, RAW के पूर्व प्रमुख ए.एस. दुलत, मणिशंकर अय्यर, हुमायूं कबीर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी और कई अन्य लोग शामिल हैं। 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' की ओर से जारी यह अपील प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित थी।

पत्र में प्रमुख मांगें

पूर्ण राजनयिक संबंधों की बहाली।

नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की पुनः नियुक्ति।

सामान्य वीज़ा सेवाओं की पुनः शुरुआत।

जम्मू और कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय वार्ता पुनः शुरू करना।

कश्मीर पर 2004-2007 के समझौते की समीक्षा।

दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए विसैन्यीकरण और तनाव कम करने की दिशा में कदम।

व्यापार और यात्रा के लिए अटारी-वाघा सीमा को पुनः खोलना।

श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा पुनः शुरू करना।

वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र को पुनः खोलना।

करतारपुर साहिब कॉरिडोर को पुनः खोलना।

पाकिस्तान की नीलम घाटी में शारदा पीठ और अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों तक पहुंच को सुगम बनाना।

पत्र का समापन दोनों सरकारों से अलगाव के बजाय जुड़ाव, शत्रुता के बजाय संवाद और टकराव के बजाय सहयोग चुनने का आग्रह करते हुए किया गया।

मीरवाइज़ ने पाकिस्तान के साथ बातचीत का समर्थन किया

अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने बातचीत की अपनी अपील का बचाव करते हुए कहा कि अगर संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज़ पर लौट सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान को भी बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध से विवाद हल नहीं होते और तर्क दिया कि केवल बातचीत से ही कश्मीर मुद्दे सहित लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान हो सकता है। मीरवाइज़ ने यह भी कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में भारी आर्थिक क्षमता और प्रचुर मानव संसाधन हैं, जिनका पूरा लाभ तभी उठाया जा सकता है जब राजनीतिक नेतृत्व संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करे।

बीजेपी ने पलटवार किया, हस्ताक्षर करने वालों को 'आतंकवाद का समर्थक' बताया

बीजेपी ने हस्ताक्षर करने वालों पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे बार-बार पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत कर रहे हैं, जबकि इस्लामाबाद लगातार सीमा पार आतंकवाद का समर्थन कर रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने हस्ताक्षर करने वालों को 'आतंकवाद का समर्थक' बताया और उनके समय पर सवाल उठाया, जबकि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ़ सख़्त नीति अपनाई है। ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए पूनावाला ने कहा कि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवादियों और उन्हें पनाह देने वालों के बीच कोई फ़र्क नहीं करेगा। उन्होंने सिंधु जल संधि को रोके रखने के भारत के फ़ैसले की ओर भी इशारा किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि 'नए भारत' की नीति आतंकवाद का निर्णायक रूप से जवाब देने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की सशस्त्र सेनाओं के साथ खड़े होने और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाने के बजाय, हस्ताक्षर करने वाले एक बार फिर इस्लामाबाद के साथ बातचीत की वकालत कर रहे थे। पूनावाला ने आगे दावा किया कि इन्हीं नेताओं ने भारत की सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए थे, और कहा कि यह ताज़ा अपील देश के शहीदों और सशस्त्र सेनाओं का अपमान है। 

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