साक्षात्कारः मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने कहा- खालिस्तानियों के मंसूबे पूरे नहीं होंगे

By डॉ. रमेश ठाकुर | May 16, 2022

पंजाब में लगातार होती हिंसक घटनाओं ने 1983-85 के दौर की याद दिलवा दी। खालिस्तानियों के झंडे लहरने लगे हैं। क्या इनके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण है या फिर दोबारा से इनका संगठन भारत में सक्रिय होने लगा है। इन्हीं तमाम मसलों को लेकर डॉ0 रमेश ठाकुर ने राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक व ‘अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा’ के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा से विस्तृत बातचीत की। वह पंजाब में बेअंत सिंह सरकार में मंत्री और भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश-

उत्तर- दुखद है और यह चिंता का विषय है। केंद्र व राज्य की हुकूमत को गंभीर होना होगा, आमजन को भी सर्तकता बरतनी होगी। देखिए, आतंकवाद से एक व्यक्ति नहीं लड़ सकता। सरकारी व्यवस्था से लेकर प्रत्येक भारतीय को आहुति देनी होगी। पंजाब के हालात पिछले कुछ समय से बिगड़े हैं, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। लेकिन इसे रोका कैसे जाए, इस बात पर मंथन करने की हमें जरूरत है। लोगों की हिमाकत तो देखिए, खुलेआम देश के प्रधानमंत्री का काफिला रोका जा रहा है। नंगी तलवार लहराते हैं। खालिस्तान का नारा बुलंद करते हैं। ऐसा तो नहीं होना चाहिए, अगर हो रहा है, तो हमारे लिए शर्म वाली बात है।

प्रश्नः खालिस्तानियों की जहां तक बात है, आपने तो वर्षों से इनके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है?

उत्तर- इनकी अब उतनी औकात नहीं जो दोबारा से फन फैला सकें। कुचलकर रख देंगे इनके मंसूबों को। खालिस्तान बनने के खिलाफ हमारी लड़ाई पहले से लेकर आज तक जारी है, आगे भी जारी रहेगी। करीब 36 हजार बेगुनाहों का कत्लेआम हुआ जिसमें 19 हजार हमारे हिंदू भाई थे। मैंने भी इस देश की अखंड़ता के लिए गोली खाई है, बम से हमला सहा है जिसमें मेरे शरीर का करीब आधा हिस्सा नष्ट हुआ है। बावजूद इसके शरीर का एक-एक कतरा देश पर कुर्बान है। हिंदू-सिख का रिश्ता रोटी और बोटी जैसा है जिसे तोड़ने के प्रयास हुए हैं, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे। मुठ्ठीभर खालिस्तानियों का सपना पंजाब को अपनाने का कभी पूरा नहीं होगा।

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प्रश्नः क्या आपको लगता है कि दोबारा से सक्रिय होते इनके संगठन को राजनीतिक संरक्षण मिला है?

उत्तर- मुझे लगता है, इस देश का हर व्यक्ति कभी नहीं चाहेगा कि उसके देश के किसी हिस्से पर किसी आतंकी का कब्जा हो। भारत है ये अफगानिस्तान थोड़ी ना है। मैं आपके इस सवाल से ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखता। कोई राजनीतिक पार्टी कभी नहीं चाहेगी कि आतंकियों की घुसपैठ देश में हो। मुझे नहीं लगता कि खालिस्तानियों का संगठन सक्रिय हो रहा है। कनाडा-पाकिस्तान में बैठे चंद उनके समर्थक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके माहौल गर्म करते हैं और कुछ नहीं। जो हैं वो बिलों में घुसे हुए हैं।

प्रश्नः हाल ही में प्रदर्शित हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने कश्मीरी पंड़ितों को फिर से पुनर्वास का माहौल बनाया है, इसे कैसे देखते हैं आप?

उत्तर- मैं व्यक्तिगत रूप से कश्मीरियों को पुनर्स्थापित करने के पक्ष में नहीं हूं। इसलिए कि वहां का माहौल अभी सामान्य नहीं है। हत्याएं अभी भी हो रही हैं, बीते दिनों वहां के सरकारी मुलाजिम राहुल भट्ट को भी सरेआम मार दिया गया। सिस्टम फेलियर पहले तो था ही, लेकिन रहने का माहौल अभी भी नहीं बन पाया। कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार को किसी कारगर नीति पर काम करना होगा। फिल्म ने लोगों का दर्द और कुरेद दिया है।

-डॉ. रमेश ठाकुर

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