Prabhasakshi NewsRoom: Operation Sindoor पर Congress Vs Congress, बोलने का मौका नहीं मिलने से Manish Tewari और Shashi Tharoor नाराज

By नीरज कुमार दुबे | Jul 29, 2025

पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में हुए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लोकसभा में चल रही बहस में कांग्रेस सांसद शशि थरूर और मनीष तिवारी को बोलने का अवसर नहीं देने के कारण पार्टी के अंदर असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हम आपको याद दिला दें कि मोदी सरकार ने जब इन दोनों नेताओं को आतंकवाद पर वैश्विक जनमत तैयार करने के लिए विदेश भेजे जाने वाले बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनाया था तभी से कांग्रेस शशि थरूर और मनीष तिवारी से नाराज चल रही है।

इसे भी पढ़ें: संसद में 'ऑपरेशन सिन्दूर' पर चर्चा में बजा मोदी सरकार का डंका! राजनाथ सिंह की पाक को चेतावनी, जयशंकर ने विपक्ष को घेरा

शशि थरूर ने इस विवाद पर मीडिया से बात करने से परहेज़ किया और केवल एक शब्द में कहा— “मौनव्रत”। वहीं मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक देशभक्ति गीत की पंक्तियाँ साझा कर अपनी नाराज़गी को परोक्ष रूप से जाहिर किया है। उन्होंने लिखा- "है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ, भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ।" तिवारी का यह संदेश इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे पार्टी के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं।

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में सांसदों को अलग-अलग विषयों पर बोलने का अवसर देने के लिए एक आंतरिक प्रणाली है। इसी नीति के तहत शशि थरूर को बंदरगाह विधेयक पर बोलने के लिए कहा गया, क्योंकि यह उनके तिरुवनंतपुरम निर्वाचन क्षेत्र के विझिंजम पोर्ट से संबंधित है। वहीं मनीष तिवारी को आगामी खेल विधेयकों पर बोलने का जिम्मा दिया गया है। हालांकि यह तर्क पार्टी के निर्णय पर उठ रहे सवालों को शांत करने में सफल नहीं हो पा रहा है। आलोचकों का कहना है कि शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे अनुभवी और प्रभावशाली वक्ताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर बोलने का अवसर देना चाहिए था।

देखा जाये तो यह विवाद कांग्रेस की छवि पर नकारात्मक असर डाल सकता है। एक ओर भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की पूरी कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के अंदर भी असंतोष की फुसफुसाहट सुनाई देने लगी है। अगर कांग्रेस अपनी ही वरिष्ठ और अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले नेताओं को किनारे करती दिखी, तो यह पार्टी की एकता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ने शशि थरूर से संसदीय बहस में बोलने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने उस समय यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया था।

बहरहाल, पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर पर बहस राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर विषय है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे वरिष्ठ नेताओं को लोकसभा में बोलने का अवसर नहीं देना न केवल पार्टी की रणनीतिक चूक माना जा रहा है, बल्कि यह भाजपा को हमले का आसान अवसर भी दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या वह अपने अंदरूनी असंतोष को दूर कर पाएगी।

प्रमुख खबरें

F&O Trading में घाटे का डर: SEBI के कड़े नियमों के बाद भी निवेशकों को औसतन ₹1.16 Lakh का भारी Loss

Data Privacy के साथ Meta का नया धमाका, Muse Glimmer AI Model अब सीधे आपके PC पर होगा डाउनलोड और कंट्रोल

ट्रंप मीडिया को $238 Million का भारी घाटा, Bitcoin और Crypto बाजार में गिरावट ने बढ़ाई Donald Trump की टेंशन

Banking Sector में UPI जैसा बदलाव लाएगा AI, कर्ज देने के पुराने तरीके बदलेंगे RBI Governor Sanjay Malhotra