By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 08, 2026
(फाइल फोटो के साथ) जालना (महाराष्ट्र), आठ सितंबर आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी राधाकृष्ण विखे पाटिल पर आरोप लगाया कि वे एक साल से अधिक समय से आरक्षण के मुद्दे पर मराठा समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। जालना के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 11वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर जरांगे को मंगलवार तड़के नस के जरिए (आईवी) तरल पदार्थ लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, मराठा आरक्षण पर बनी उपसमिति के प्रमुख विखे पाटिल ने उनसे ‘दो कदम आगे बढ़ने’ और अपनी मांगों पर राज्य सरकार के सकारात्मक फैसलों को स्वीकार करने का आग्रह किया।
उनकी मांगों में हैदराबाद और सतारा गजट के रिकॉर्ड को लागू करना तथा मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। कुनबी एक पारंपरिक कृषि समुदाय है, जिसे आधिकारिक तौर पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में रखा गया है। इसके कारण इस समुदाय के लोग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पाने के पात्र हैं।
जरांगे ने फडणवीस से उनके उस पुराने वादे को लेकर सवाल किया, जिसमें उन्होंने दो महीने के भीतर हैदराबाद गजट के आधार पर आरक्षण देने की बात कही थी। उन्होंने फडणवीस से इस देरी की वजह बताने की चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘विखे पाटिल ने एक साल तक मराठा समुदाय को गुमराह किया है और उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।’’ जरांगे ने कहा कि अगर प्रदर्शन स्थल पर कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं भी आता है, तब भी आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में पूरे महाराष्ट्र से मराठा समुदाय के सदस्यों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में विखे पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार ने जरांगे द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर फैसले लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में लिए गए फैसलों से मराठा समुदाय को न्याय मिला है और इससे पहले कभी ऐसे कदम नहीं उठाए गए।
विखे पाटिल ने कहा, ‘‘जरांगे द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर सरकार ने एक कदम आगे बढ़कर फैसले लिए हैं। जब सरकार फैसले ले रही है तो उन्हें भी दो कदम आगे बढ़ना चाहिए।