By विजयेन्दर शर्मा | Jul 22, 2021
शिमला। दुनिया में बेहतरीन किस्म की भांग उगाने के लिए मशहूर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू की वादियों में आने वाले कई विदेशी अब तक वापस अपने वतन नहीं लौट पाए हैं। बीस से अधिक विदेशी पर्यटक कुल्लू में कई सालों से लापता हैं उनका कोई अता पता नहीं चल पा रहा है। कई विदेशी तो जेलों में बंद हैं। दरअसल, कुल्लू विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा सैरगाह रहा है यहां आसानी से भांग चरस व दूसरा नशा उपलब्ध है लिहाजा जो विदेशी यहां आया व वापिस लौटना नहीं चाहता किसी न किसी तरीके से यहां रहने की उसकी चाहत होती है। वहां के पहाड़ों में इसी वजह से कई विदेशी गुपचुप तरीके से महीनों तक रहते रहे हैं। बाद में पहाड़ों में लापता हो जाते हैं। पुलिस और प्रशासन सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर विदेशी सैलानी कुल्लू सस्ते और हाई क्वालिटी चरस की खोज में आते हैं, जोकि आम तौर पर यहां आसानी से मिल जाता है। विदेशी पर्यटक गांवों में महीनों गुजारते हैं और शायद भी ट्रेकिंग या साइटसीइंग के लिए जाते हैं। वे एक गांव से दूसरे गांव में ही जाते रहते हैं।
पुलिस ने मंडी जिले की चौहार घाटी में एक सुदूर टिक्कन उप-तहसील में 15 लाख पोस्त के पौधों के साथ अवैध खेती के तहत 66 बीघा जमीन का पता लगाने में भी सफलता हासिल की। पुलिस ने 19 मामलों में नशा करने वालों की 11.37 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। यहां तक कि तत्कालीन राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने भी राज्य की राजधानी में 26 जून को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एक समारोह में पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए खतरनाक स्थिति की चेतावनी दी। हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के रूप में जाना जाता है और इसकी संस्कृति, जीवन शैली और विचारधारा बहुत समृद्ध है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या गंभीर रूप से पैदा हो गई है और अगर हमने इसे तुरंत नहीं रोका तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है।