‘तालिबान प्रशासन के कई नाम संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में, सुरक्षा परिषद को सोचने होंगे कदम’

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 11, 2021

संयुक्त राष्ट्र की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अफगानिस्तान में प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री समेत तालिबान प्रशासन के अनेक सदस्यों के नाम संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल हैं और सुरक्षा परिषद को प्रतिबंधों की सूची पर कदमों को लेकर फैसला करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर चलने की उम्मीद करनेवाले निराश होंगे क्योंकि सूची में किसी महिला का नाम नहीं है तथा कोई गैर-तालिबान सदस्य नहीं हैं, पिछली सरकार से कोई नहीं है और न ही अल्पसंख्यक समूह का कोई नेता है।

लियोन्स ने बृहस्पतिवार को अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद की चर्चा में कहा कि मौजूदा शासन में 1996 से 2001 के बीच तालिबान नेतृत्व में शामिल रहे कई लोग हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां बैठे लोगों के लिए उन 33 नामों का तात्कालिक और व्यावहारिक महत्व क्या है जिनमें से अधिकतर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में हैं और इनमें वहां के प्रधानमंत्री, दो उपप्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री भी हैं।

आप सभी को फैसला लेना होगा कि पाबंदी सूची के संबंध में क्या कदम उठाने हैं और भविष्य की साझेदारी पर क्या असर होगा।’’ तालिबान ने अपनी प्रभावशाली ‘रहबरी शूरा’ के प्रमुख मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के नेतृत्व में कट्टरपंथी अंतरिम सरकार की घोषणा की है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी सिराजुद्दीन हक्कानी भी अंतरिम तालिबान सरकार में शामिल है। हक्कानी नेटवर्क को बनाने वाले जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा और वैश्विक रूप से घोषित आतंकवादी सिराजुद्दीन हक्कानी को तालिबान सरकार में नया कार्यवाहक गृह मंत्री बनाया गया है।

लियोन्स ने कहा कि नयी हकीकत यह है कि लाखों अफगानों की जिंदगी इस बात पर निर्भर करेगी कि तालिबान किस तरह शासन चलाना पसंद करेगा। उन्होंने आगाह किया कि अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम का असर उसकी सीमाओं के परे भी महसूस किया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के कई पड़ोसी देशों को डर है कि तालिबान के शासन से उनकी खुद की सुरक्षा किस तरह प्रभावित होगी। उन्हें एक विस्तारित इस्लामिक स्टेट के असर को लेकर आशंकाए हैं जिसे तालिबान नियंत्रित नहीं कर सकता।

उन्हें उनकी सीमाओं पर बड़ी संख्या में शरणार्थियों के आने की आशंका है। उन्हें अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में हथियार छूटने के नतीजों को लेकर डर है।

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