Marco Rubio ने अपने दिल्ली दौरे से पहले ही खड़ा कर दिया विवाद, कांग्रेस ने 'भारत की स्वतंत्र विदेश नीति' पर उठाया सवाल

By नीरज कुमार दुबे | May 22, 2026

अमेरिका, भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को घोषणा की कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज अगले सप्ताह भारत की यात्रा कर सकती हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा संबंधों को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

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अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि वेनेजुएला के तेल को लेकर भी भारत के साथ अवसर मौजूद हैं। उन्होंने संकेत दिया कि भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा व्यापार को अमेरिका अप्रत्यक्ष समर्थन दे रहा है। दरअसल, अमेरिका चाहता है कि भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करे और वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़े। इसी रणनीति के तहत वेनेजुएला के तेल को भारतीय बाजार तक पहुंचाने के प्रयास तेज हुए हैं।

हम आपको बता दें कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। वहीं भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और कच्चे तेल के लिए विदेशी बाजारों पर अत्यधिक निर्भर है। ऐसे में नई दिल्ली लंबे समय से ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रही है। पहले भारत ईरान से भी भारी मात्रा में तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों की चेतावनी के बाद यह व्यापार काफी कम हो गया था।

सूत्रों के अनुसार, डेल्सी रोड्रिगेज को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस सम्मेलन में शामिल होना था। यह भारत की अगुवाई में बनाया गया अंतर सरकारी मंच है। इस सम्मेलन में 95 देशों को आमंत्रित किया गया था। हालांकि, अफ्रीका में इबोला संक्रमण फैलने के कारण इस सम्मेलन को स्थगित कर दिया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि यह निर्णय अफ्रीकी देशों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में फैले इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। सम्मेलन टलने के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि डेल्सी रोड्रिगेज भारत आएंगी या नहीं हालांकि मार्को रुबियो ने कहा है कि वह भारत जा रही हैं।

उधर, इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की कूटनीति को लेकर राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं अब वाशिंगटन से सार्वजनिक की जा रही हैं। जयराम रमेश ने कहा कि किसी विदेशी नेता की यात्रा की आधिकारिक घोषणा पहले मेजबान देश या संबंधित सरकार की ओर से की जाती है, लेकिन इस मामले में अमेरिका ने पहले जानकारी देकर परंपरागत कूटनीतिक मर्यादाओं को तोड़ा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी अमेरिकी विदेश मंत्री ने “ऑपरेशन सिंदूर” से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की थी। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि भारतीय विदेश नीति को लेकर अमेरिका की भूमिका आखिर कितनी बढ़ती जा रही है।

वहीं ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच यह नया समीकरण वैश्विक ऊर्जा राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। रूस और ईरान जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाने की अमेरिकी रणनीति के तहत भारत को नए ऊर्जा विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दूसरी ओर भारतीय रिफाइनरियां, विशेषकर गुजरात स्थित आधुनिक संयंत्र, वेनेजुएला के भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं। इससे भारत को अपेक्षाकृत सस्ता तेल मिल सकता है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की खोज बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में अमेरिका समर्थित वेनेजुएला तेल व्यवस्था भारत के लिए आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकती है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि डेल्सी रोड्रिगेज की संभावित भारत यात्रा आखिरकार होती है या नहीं और इस पूरे घटनाक्रम का भारत की विदेश नीति तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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