Margashirsha Durga Ashtami: मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत से अधूरी मनोकामनाएं होती हैं पूरी

By प्रज्ञा पांडेय | Nov 28, 2025

आज मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत है, सनातन धर्म में इस पर्व का अपना अलग ही महत्व है। साल के प्रत्येक महीने में मां आदि शक्ति दुर्गा की उपासना का भी विधान है। इस दिन माता दुर्गा की विधि-विधान से पूजा आराधना की जाती है, इस दौरान माता दुर्गा पृथ्वी पर निवास करती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती हैं तो आइए हम आपको मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। 

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मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी का शुभ मुहूर्त 

वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी तिथि 28 नवंबर को देर रात 12:29 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 29 नवंबर को देर रात 12:15 बजे होगा। मां दुर्गा की पूजा निशिता काल में की जाती है. इस तहर 28 नवंबर को अगहन माह की दुर्गा अष्टमी पूजा की जाएगी।

जानिए मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। इस दिन भक्त एक समय भोजन करते हैं या फिर फलाहार करते हैं। व्रत रखने से मन एकाग्र होता है और देवी दुर्गा की भक्ति में मन लगता है। पूरे विधि विधान से व्रत पूरा करने पर लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान होता है। इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है.इसलिए यह व्रत रखा जाता है।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत पर ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा

पंडितों के अनुसार दुर्गाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद गंगाजल डालकर माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। माता दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही माता दुर्गा के सामने दीप प्रज्वलित करना चाहिए। उसके बाद अक्षत सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए और भोग के रूप में मिठाई चढ़ाना चाहिए। धूप,दीप, अगरबत्ती जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से माता दुर्गा जल्द प्रसन्न होती है और अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती है।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त

- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 28 नवंबर को देर रात 12 बजकर 29 मिनट से

- अष्टमी तिथि समाप्त: 29 नवंबर को देर रात 12 बजकर 15 मिनट पर

चूंकि मासिक दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा निशीथ काल (रात) में करने का विशेष महत्व होता है, इसलिए यह पर्व 28 नवंबर को मनाया जाएगा।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन होता है शुभ

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। 9 कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र, फल, मिठाई और दक्षिणा देकर सम्मानित करें। यदि संभव न हो तो कम से कम एक कन्या का पूजन अवश्य करें। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करना भी शुभ माना जाता है।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत के दिन हर्षण योग का है खास महत्व

हर्षण योग में मां दुर्गा की पूजा करने से साधक के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और अटके हुए काम पूरे होते हैं। यह योग उन लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी है जो लंबे समय से किसी मनोकामना की पूर्ति का इंतजार कर रहे हैं या किसी शारीरिक कष्ट से परेशान हैं। पंडितों के अनुसार इस शुभ योग में की गई पूजा का प्रभाव तत्काल और स्थायी होता है।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खास 

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी की पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नामक राक्षस ने अत्याचार किया था। इस पर ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी शक्तियों से देवी दुर्गा को बनाया और देवताओं ने उन्हें हथियार दिए। देवी ने महिषासुर का वध किया, जिससे दुर्गा अष्टमी का पर्व शुरू हुआ और इसकी पूजा और व्रत से भक्तों को सुख-समृद्धि और विजय प्राप्त होती है। 

जानिए मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व

पंडितों के अनुसार मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। इस दिन भक्त एक समय भोजन करते हैं या फिर फलाहार करते हैं। व्रत रखने से मन एकाग्र होता है और देवी दुर्गा की भक्ति में मन लगता है। पूरे विधि विधान से व्रत पूरा करने पर लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान होता है। इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है और इसलिए यह व्रत रखा जाता है।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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