Explained India-Canada Fresh Relation | Mark Carney का भारत दौरा 'अविश्वास' से 'रणनीतिक साझेदारी' की ओर

By रेनू तिवारी | Mar 01, 2026

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जो इस हफ़्ते भारत के अपने पहले ऑफिशियल दौरे पर हैं, को भारत-कनाडा रिश्तों को फिर से बनाने और मज़बूत करने के एक अहम मौके के तौर पर देखा जा रहा है। सिर्फ़ 10 महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यह उनकी तीसरी मीटिंग होगी, यह एक ऐसी रफ़्तार है जो पिछले तनावों से आगे बढ़ने की एक गंभीर कोशिश का संकेत देती है। भारत और कनाडा के बीच रिश्ते 2023-24 में तनावपूर्ण रहे, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर गलत काम करने का आरोप लगाया। डिप्लोमैट्स को निकाल दिया गया, राजनीतिक बयान तीखे हो गए, और व्यापार और यात्रा पर असर पड़ा। भरोसा टूट गया, जिससे रिश्ते कमज़ोर हो गए। नरमी 2025 में शुरू हुई, जिसमें बातचीत और व्यवस्थित बातचीत से तनाव कम हुआ। अजीत डोभाल की अगुवाई में सुरक्षा चर्चाओं ने विवादित मुद्दों को औपचारिक तरीकों से जोड़ने में मदद की, जिससे दोनों पक्ष टकराव के बजाय सहयोग पर ध्यान दे सके।

 

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संकट से सामान्यीकरण तक का सफर (2023-2026)

भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में तब भारी गिरावट आई थी जब खालिस्तानी उग्रवाद और कूटनीतिक निष्कासन (Expulsions) जैसे मुद्दों पर विवाद बढ़ा था।कनाडा की नई सरकार (मार्क कार्नी के नेतृत्व में) ने एक अधिक 'प्रैग्मैटिक' (व्यावहारिक) विदेश नीति अपनाई। भारत के NSA अजीत डोभाल और कनाडाई अधिकारियों के बीच हुई चर्चाओं ने विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार किया। आज स्थिति यह है कि कनाडाई प्रशासन अब भारत पर किसी भी तरह के हिंसक हस्तक्षेप का आरोप नहीं लगा रहा है, जिससे कूटनीतिक रिश्तों के लिए रास्ता साफ हुआ है।


CEPA: आर्थिक इंजन को फिर से शुरू करना

इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) की बहाली है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $50 बिलियन तक पहुँचाना।

 कनाडाई पेंशन फंड पहले ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स में $100 बिलियन से अधिक का निवेश कर चुके हैं। CEPA के आने से इसमें तीन गुना बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऊर्जा, डिजिटल सेवाएं, सेमीकंडक्टर और 'क्रिटिकल मिनरल्स' (Critical Minerals)।


ऊर्जा और डिफेंस में नई पार्टनरशिप

मार्क कार्नी का दौरा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें 'स्ट्रेटेजिक' हितों पर भी जोर है:-

 

यूरेनियम सप्लाई: भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के लिए कनाडा से यूरेनियम की स्थिर आपूर्ति पर एक दीर्घकालिक समझौता होने की संभावना है।

SHANTI Act 2025: भारत के नए परमाणु सुधारों के तहत कनाडाई तकनीक और विदेशी निवेश को आकर्षित करने पर चर्चा होगी।

AI और डिफेंस: उभरती हुई तकनीकों और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए नए MoUs (समझौता ज्ञापनों) पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

 

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'मिडल पावर' रणनीति और ग्लोबल अनिश्चितता

दोनों देश अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करना चाहते हैं। कनाडा के लिए भारत एक विशाल बाजार है जो चीन का विकल्प बन सकता है। भारत के लिए कनाडा तकनीक, ऊर्जा और निवेश का एक विश्वसनीय स्रोत है। मार्क कार्नी का बयान: "एक अनिश्चित दुनिया में, हम उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं—व्यापार का विविधीकरण और नई अंतरराष्ट्रीय साझेदारी।"

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