Iran-Israel Clash से सहमा बाजार, Crude Oil में भारी उछाल, Global Economy पर संकट के बादल।

By Ankit Jaiswal | Jun 08, 2026

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज उछाल देखने को मिला। हालांकि बाद में कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है। निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष वैश्विक तेल आपूर्ति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।

ईरान की सेना ने सोमवार को दावा किया कि अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद इजराइल के खिलाफ शुरू की गई उसकी पहली सैन्य कार्रवाई का चरण पूरा हो चुका है। हालांकि साथ ही ईरान ने चेतावनी भी दी है कि यदि इजराइल लेबनान में हमले जारी रखता है तो उसकी प्रतिक्रिया और अधिक कठोर हो सकती है। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में इजराइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार इजराइल ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान स्थित एक पेट्रोरसायन संयंत्र को निशाना बनाया, जिसके बारे में दावा किया गया कि उसका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण में किया जाता था। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने इजराइल के हाइफा शहर में एक समान प्रतिष्ठान पर हमला करने की बात कही है।

बता दें कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब इजराइल ने सप्ताहांत में लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए थे। ईरान लगातार यह कहता रहा है कि संघर्ष समाप्त करने के लिए होने वाली किसी भी वार्ता में लेबनान में इजराइली सैन्य अभियान को रोकना जरूरी है।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों से तुरंत गोलीबारी और हमले रोकने की अपील की है। हालांकि जमीनी हालात फिलहाल किसी स्थायी समाधान की ओर बढ़ते नहीं दिख रहे हैं।

तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी हुई है। गौरतलब है कि यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन होने वाली तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या व्यवधान पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार मॉस्को में ईरान के राजदूत ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा, लेकिन इसके संचालन से जुड़ी कुछ शर्तें ईरान और ओमान द्वारा तय की जाएंगी। इनमें पारगमन शुल्क जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं।

दूसरी ओर तेल उत्पादक देशों के समूह और उसके सहयोगी देशों ने आपूर्ति संकट को देखते हुए उत्पादन लक्ष्य में लगातार चौथी बार बढ़ोतरी पर सहमति जताई है। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि इसका वास्तविक प्रभाव सीमित रहेगा। वजह यह है कि कई सदस्य देश मौजूदा परिस्थितियों में अपने निर्धारित उत्पादन लक्ष्य तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा, रूस की उत्पादन क्षमता पर हमले और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण वैश्विक बाजार पहले ही भारी दबाव में है। रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद से दुनिया एक अरब बैरल से अधिक तेल आपूर्ति खो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस संकट का असर और गहरा हो सकता है।

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