By अभिनय आकाश | Sep 21, 2026
यूक्रेन ने 20 सितंबर को यहां कई ड्रोन हमले किए हैं। आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि रूस ने दावा किया है कि यूक्रेन की तरफ से आने वाले 1600 ड्रोंस को उसने इंटरसेप्ट किया है । इस हमले में दो लोगों की मौत हुई है। यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। कई इमारतों को इसमें नुकसान भी पहुंचा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग चल रही थी। वोटिंग का अंतिम दिन था। लोअर हाउस जो संसद है रूस का उसके लोअर हाउस के लिए यह वोटिंग थी। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलदोमीर जेलस्की ने खुद हमले की जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, हमने रूस की ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया। यह वही अरबों डॉलर का तंत्र है जहां रूस अपने डिफेंस का सामान तैयार करता है। जेलेंस्की ने यह भी बताया हमले में यूक्रेन ने क्या-क्या इस्तेमाल किया है। एफपी1 आर एमआईसीए 2000 पालतसिया वेंडेटा ल्यूती, बार्स, फ्लेमिंगो, सिचन और पेिकन यह तमाम हथियार हैं जिसका इस्तेमाल यूक्रेन ने किया है। यह सभी कामिकाजे ड्रोंस हैं। कुछ ड्रोन का मिसाइल हैं। लंबी दूरी वाले ड्रोंस हैं ये। जेलस्की ने बताया कि यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस एसबीयू ने अनमैंड सिस्टम फोर्सेस डिफेंस इंटेलिजेंस और फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस के साथ मिलकर इस हमले को अंजाम दिया है। मॉस्को के मेयर सरगेई सोवियान ने बताया कि रूसी एयर डिफेंस ने अब तक 1600 से ज्यादा ड्रोंस को इंटरसेप्ट किया, मार गिराया। जिनमें से 450 ड्रोनस सीधे राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे यूक्रेन की तरफ से। सोबियान ने टेलीग्राम पर बताया यह हमला साफ तौर पर इलेक्शंस में बाधा डालने के इरादे से प्लान किया गया था। लेकिन दुश्मन अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सका। सोबियान के मुताबिक कई ड्रोंस मॉस्को की तेल रिफाइनरी के अंदर पहुंच गए जिसे पहले भी हमलों में निशाना बनाए जाने की कोशिश की जा चुकी है। इस ऑयल रिफाइनरी को पहले भी यूक्रेन टारगेट कर चुका है।
इसीलिए यूक्रेन जंग रुक नहीं रही। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका यूक्रेन को लगातार हथियार दे रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब और यूक्रेन के तेल को निशाना बनाकर अमेरिका ग्लोबल ऑयल सप्लाई को बाधित कर रहा है। दुनिया भर में डीजल और पेट्रोल की सप्लाई अब कम हो रही है। आने वाले दिनों में दाम बढ़ने तय हैं। आपको बता दें कि भारत और चीन को अगर सऊदी अरब और रूस दोनों से पूरी तरह कच्चा तेल मिलना बंद हो गया तो दोनों की अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा झटका लगेगा। लेकिन भारत को जो नुकसान होगा उसकी कीमत दुनिया को चुकानी पड़ेगी क्योंकि भारत के पास ही ऐसी ऑयल रिफाइनरीज हैं जो रूस के कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं और उसे पेट्रोल और डीजल बनाकर दुनिया भर में सप्लाई करती हैं। इस मुश्किल घड़ी में रूस, चीन और भारत को मिलकर धमाका करना होगा।