By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 08, 2026
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) के ‘‘ब्राह्मण प्रेम’’ पर तीखा प्रहार करते हुए शनिवार को कहा कि सपा अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए ‘‘गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है।’’
लेकिन अब ब्राह्मण समाज को बसपा से तेजी से जुड़ता देख और उसी आधार पर पार्टी उम्मीदवार बनाए जाने से घबराकर सपा ने ‘पी’ का मतलब ‘पंडित’ कर दिया है। यह उनके राजनीतिक छलावे का जीता-जागता प्रमाण है।’’ पांच अगस्त को समाजवादी नेता दिवंगत जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि पीडीए में ‘पी’ का मतलब ‘पंडित’ है। मायावती ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘ऐसी छल की राजनीति से किसी व्यक्ति का कुछ समय के लिए भला हो सकता है, लेकिन पूरे समाज का भला कभी नहीं हो सकता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए सर्वसमाज के लोगों को ऐसी छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी और उसकी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से सावधान रहना चाहिए।
यह समय की मांग है और सर्वसमाज के हित में भी है।