By एकता | Sep 20, 2026
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने परिवार के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला किया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, अब उनके भाई आनंद कुमार की बेटी कुमारी दीपिका आनंद को भी पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है। मायावती ने अपने फैसले को परिवार से ज्यादा पार्टी और बहुजन समाज के हित से जोड़ते हुए कई पुराने उदाहरण भी दिए हैं।
उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपने करीबी रिश्तेदारों को राजनीतिक फायदा देने से दूरी बनाए रखी थी। उनके मुताबिक, रिश्तेदारों को केवल पार्टी संगठन में बिना किसी निजी लाभ के काम करने की अनुमति थी।
मायावती ने कहा कि उन्होंने भी कांशीराम के इसी रास्ते पर चलने का फैसला किया और अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के लिए समर्पित किया।
मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के खास आग्रह पर उन्होंने आकाश आनंद को राजनीति में आगे बढ़ाया था। हालांकि, मायावती के मुताबिक शादी के बाद आकाश के व्यवहार और गतिविधियों में बदलाव आया।
मायावती ने कहा कि इसी वजह से उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा। उन्होंने आकाश पर अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आकाश को दोबारा पार्टी में शामिल करना पार्टी के साथ विश्वासघात होगा।
मायावती ने अब यह साफ किया है कि दीपिका आनंद को भी पार्टी में कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्होंने परिवार के सदस्यों को जिम्मेदारी देने के मामले में सावधानी बरतने की बात कही है।
मायावती का कहना है कि शादी के बाद दीपिका भी आकाश की तरह ससुराल पक्ष के प्रभाव में आ सकती हैं। इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने दीपिका को पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है।
यह फैसला कुछ दिन पहले के उनके रुख से अलग है। 12 सितंबर को मायावती ने कहा था कि अगर आनंद कुमार को पार्टी के काम में परिवार के किसी सदस्य की मदद की जरूरत हो तो उनकी बेटी दीपिका इसमें मदद कर सकती हैं।
दीपिका को जिम्मेदारी से दूर रखने के बाद मायावती ने अब ईशान आनंद को फिर से मौका देने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने ईशान को भी साफ चेतावनी दी है कि पार्टी विरोधी किसी गंभीर गतिविधि में शामिल होने पर उन्हें भी पार्टी से बाहर किया जा सकता है।
मायावती ने कहा कि अगर ईशान के साथ भी ऐसी स्थिति बनती है तो आनंद कुमार के परिवार के किसी दूसरे सदस्य को पार्टी में छोटी या बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय पार्टी में काम कर रहे किसी "मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता" को आगे बढ़ाया जाएगा।
अपने फैसले को समझाते हुए मायावती ने कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण दिया। उन्होंने 23 फरवरी 1956 के उस पत्र का भी जिक्र किया, जो उनके मुताबिक डॉ. आंबेडकर ने अपने बेटे यशवंत आंबेडकर को लिखा था।
मायावती ने कहा कि इस उदाहरण से यह साफ होता है कि सार्वजनिक काम और आंदोलन के हित में जरूरत पड़ने पर परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी फैसला लिया जा सकता है।
मायावती ने अपने संदेश के अंत में कहा कि "समस्त बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार है।" उन्होंने कहा कि सत्ता की "मास्टर चाबी" के जरिए बहुजन समाज को शोषित से शासक वर्ग बनाना और उनके हित व कल्याण को सुनिश्चित करना उनका मिशन है।
मायावती ने यह भी कहा कि इस लक्ष्य के लिए वह अपने भाई-बहनों और रिश्तेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी।
बीएसपी ने 23 सितंबर को लखनऊ में एक और अखिल भारतीय बैठक बुलाई है। यह एक महीने के भीतर पार्टी की दूसरी राष्ट्रीय स्तर की बैठक होगी। इस बैठक से पहले परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर मायावती के लगातार बदलते फैसले पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बने हुए हैं।