By नीरज कुमार दुबे | Feb 05, 2026
भारत ने आज कहा कि अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी शीर्ष प्राथमिकता है और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद को लेकर उसका नजरिया मुख्य रूप से इसी बात पर आधारित है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेसवार्ता में ये टिप्पणियां अमेरिका के इस दावे के जवाब में कीं कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है। जायसवाल ने कहा, ‘‘जहां तक भारत की ऊर्जा खरीद का सवाल है, सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बाजार की स्थितियों और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से अपनी ऊर्जा खरीद में विविधता लाना, हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। भारत के सभी कदम इसी बात को ध्यान में रखकर उठाए जाते हैं और भविष्य में भी इसका अनुसरण किया जाएगा।''
जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण भारत की स्थायी नीति है। यानी भारत एक ही देश पर निर्भर रहने की बजाय कई विकल्प खुला रखता है ताकि आपूर्ति, कीमत और रणनीतिक संतुलन बना रहे। यह बयान अपने आप में उन सभी अटकलों पर प्रहार था जो यह दिखाने की कोशिश कर रही थीं कि भारत किसी एक खेमे की तरफ झुक रहा है।
वेनेजुएला को लेकर भी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इतिहास और वर्तमान दोनों सामने रखे। उन्होंने बताया कि वेनेजुएला लंबे समय से भारत का ऊर्जा साझेदार रहा है। वर्ष 2019 तक वहां से तेल आता रहा, लेकिन प्रतिबंधों के कारण खरीद रोकनी पड़ी। बाद में 2023 और 2024 के बीच कुछ समय के लिए खरीद फिर शुरू हुई, पर दोबारा प्रतिबंध लगने से उसे रोकना पड़ा। इसके बावजूद भारत ने दरवाजा बंद नहीं किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय उपक्रम वहां काम कर रही अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों के साथ साझेदारी रखे हुए हैं और यदि वाणिज्यिक लाभ दिखा तो भविष्य में आपूर्ति पर विचार होगा।
जायसवाल ने साथ ही भारत अमेरिका व्यापार समझौते संबंधी एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच दूरभाष पर वार्ता के बाद जो स्थिति बनी, उसके आधार पर परस्पर शुल्क में कमी को लेकर अमेरिका ने कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अब भारत में बने उत्पाद अमेरिका को 18 प्रतिशत शुल्क पर भेजे जा सकेंगे। इसे उन्होंने भारतीय निर्यात के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से भी यही शुल्क दर स्पष्ट की गई है।
जायसवाल ने साथ ही एक प्रश्न के उत्तर में यह भी बताया कि ईरान में पकड़े गए 16 भारतीय नाविकों को वाणिज्य दूतावासीय की पहुंच मिल चुकी है। बंदर अब्बास में भारतीय अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की है। ईरानी पक्ष के अनुसार आठ नाविक रिहा कर दिए गए हैं और वह घर लौटेंगे। बाकी आठ के मामले में लगातार संपर्क बना हुआ है और हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में होने वाली वार्ता से पहले वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की वार्ता के संबंध में उन्होंने जानकारी दी कि इसमें ईरान के मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
देखा जाये तो विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रियाओं ने जता दिया कि भारत वैश्विक मंच पर अपने हित खुलकर रखता है। चाहे तेल की खरीद हो, व्यापार समझौता हो या विदेश में फंसे नागरिकों की सुरक्षा, हर मामले में निर्णय की धुरी भारत का अपना हित है। बाहरी दावों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच नई दिल्ली ने साफ कर दिया कि भारत की नीति किसी और की घोषणा से नहीं बदलती। भारत सुनता सबकी है, करता अपने मन की है और उसका मन साफ कह रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक लाभ और नागरिकों की रक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।