By दिनेश शुक्ल | Jun 12, 2020
भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ‘कुलपति संवाद’ ऑनलाइन व्याख्यानमाला में प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि निर्भया प्रकरण में मीडिया ने आंदोलनकर्ता की भूमिका निभाई, जिसके कारण उस मुद्दे पर सबका ध्यान गया। निर्भया को न्याय मिला या नहीं, यह बहस का विषय हो सकता है लेकिन मीडिया के कारण उसके अपराधियों को सजा अवश्य मिली है। यदि आज स्त्री मुद्दों के साथ मीडिया के संपादकीय और उनके स्लोगन जन आंदोलन बनकर प्रस्तुत होंगे, तो समाज में बहुत परिवर्तन आ सकता है। मीडिया की यह शक्ति है कि वह स्त्री मुद्दों पर देश-समाज में जनांदोलन खड़ा कर सकती है।
प्रो. शुक्ला ने समाज की दोहरी मानसिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि सार्वजानिक तौर पर स्त्री के अधिकारों का समर्थन करने वाला समाज अक्सर उसके निर्णयों पर विचलित हो जाता है। क्यों स्त्री और पुरुष, दोनों के परस्पर संबंधों में स्त्रियों को अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है? उन्होंने मीडिया क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं से अनुरोध किया कि मीडिया क्षेत्र में कदम रखने वाली वरिष्ठ महिला पत्रकार इस क्षेत्र में आने वाली लड़कियों का हाथ पकड़ कर उनका मार्गदर्शन करें, उन्हें हौसला दें।