रूसी विदेश मंत्री का मध्यस्थता वाला बयान, क्या मानवीय तबाही को कम करने के लिए राष्ट्रीय हित में आगे आएगा भारत?

By अभिनय आकाश | Apr 01, 2022

एक तरफ जब पूरी दुनिया विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। वहीं दूसरी ओर वैश्विक राजनीति में बड़ी उछल-पुथल जारी है। युद्ध के बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावारोव के भारत दौरे पर अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 40 मिनट तक बातचीत की है। रूसी विदेश मंत्री के साथ पीएम मोदी की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच बातचीत को लेकर रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका का समर्थन करने वाले सभी पश्चिमी देशों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हमारे सभी पश्चचिमी दोस्त मौजूदा समय में सभी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को यूक्रेन विवाद के साथ जोड़कर उसका महत्व कम करने में लगे हुए हैं। उन्होंने भारत के इस मुद्दे पर तटस्थ बने रहने पर जमकर सराहना की और कहा कि वो किसी से लड़ाई नहीं चाहते हैं। 

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पश्चिमी प्रतिबंधों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रूस की क्षमता में कमी होना लाजिमी है। जिससे यूरेशिया में चीन की स्थिति और मजबूत होगी। ऐसा नतीजा भारत को परेशानी में डाल सकता है। भारत की विदेश नीति में रूस एक महत्वपूर्ण भागेदार है चाहे मध्य एशिया हो या अफ़ग़ानिस्तान या पश्चिम एशिया, मॉस्को का प्रभाव सकारात्मक रूप से देखा जाता रहा है। मानवीय तबाही को कम करने और राष्ट्रीय हित को बनाए रखने की कोशिश में अगर भारत रूस के प्रति मित्रता का व्यवहार रखने वाले दूसरे देशों के प्रयासों के साथ मिलकर यूक्रेन के साथ बातचीत को बढ़ावा देने के लिए आगे आता है तो ये रूस और यूक्रेन के साथ-साथ दुनिया के लिए भी बेहतर विकल्प हो सकता है। 

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