बरसात से न निपटने के लिए बैठक (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jun 21, 2021

बरसात से निपटने के लिए ज़रूरी बैठक हमारे कार्यालय के हॉल में ही होनी थी। अभी तो बैठक आयोजित करने के बाद रिलीज़ होने वाली प्रेस विज्ञप्ति भी तैयार नहीं थी। वैसे उसमें ज़्यादा दिक्कत नहीं होती तारीख बदलकर पिछले साल वाली ही प्रयोग कर ली जाती है। कुछ लोग ठीक समय पर आ गए थे उन्हें दिल और दिमाग से लग रहा था कि मानसून ने इस बार जल्दी आकर उनके साथ बहुत गलत दिया। हॉल में उंघते और लेट आ रहे बंदे बिना इंतज़ार कराए आ चुके मानसून को भिगो भिगो कर गालियां दे रहे थे। मानसून की पहली ज़ोरदार बारिश हो रही थी और प्रबंधन की पोल खुल कर बहने  का उद्घाटन हो चुका था।

नालियां साफ़ करने नहीं जाते थे कूड़ा खुद ही बारिश के पानी में बह जाता था। सख्त निर्देश दिए गए, नदी किनारे रहने वालों को बरसात शुरू होने से पहले, कहीं भी जाने को कहें। सूचना तंत्र अच्छी तरह से व्यवस्थित हो, नहीं तो लोग बह जाते हैं फिर ख़बरें छपती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार भी संवेदनशील सड़कों, जलापूर्ति योजनाओं, बिजली की तारों, बाढ़ व भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान करनी रह गई थी। जेसीबी चालक के फोन नंबर नोट करने भी रह गए थे इस बार तो कर ही लें। यह निर्देश अधिकांश लोगों ने सिर्फ नोट करने के लिए नोट किए। स्वास्थ्य विभाग, जल विभाग व खाद्य विभाग को दवाएं राशन व अन्य खाद्य सामग्री वगैरा की उचित व्यवस्था करने बारे कहा। यह विषय सही ढंग से नोट किया गया क्यूंकि इसमें बहुतों का फायदा था। सम्बंधित विभाग वालों ने पिछले साल से बढ़िया करने का स्वनिश्चय किया। बरसात से निपटने के लिए सुघड़ कार्य योजना बनाने का आग्रह किया। मानव जीवन, सम्पति नुक्सान की नियमित रिपोर्ट, रंगीन फोटो बढ़िया प्रभावशाली वीडियो तुरंत साझा करने को कहा। अध्यक्ष को पता था पिछले साल भी यही भाषण दिया था लेकिन उसका ज्यादा असर नहीं हुआ था।

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आज यह वार्षिक ख्याल भी आ गया कि जो बच्चे नदी नाले पार कर स्कूल जाते हैं उनके बारे विस्तृत रिपोर्ट बनाने और कारगर कदम उठाए जाने ज़रूरी हैं। मुझे बैठक में बैठे बैठे लगने लगा कि कई दर्जन छोटे पुल बनने वाले हैं। कैंटीन वाले ने दो तीन साहबों को कप प्लेट में ताज़ी चाय बनाकर दे दी थी बाकी सबको गर्म कर बासी परोस दी थी। बैठक खत्म हुई, बाहर काफी कचरा बह कर नाले में फंस गया था। कचरे को लग रहा था, कोई तो उसे देखेगा, उसे बिना देखे सभी ने सुनिश्चित कर लिया कि जब तेज़ बारिश आएगी कचरा उसमें खुद बह जाएगा। कचरा समझ गया यह बैठक बरसात से न निपटने की तैयारी के लिए की गई थी।

- संतोष उत्सुक

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