लोकसभा में सदस्यों ने ई-सिगरेट के साथ अन्य तंबाकू उत्पादों पर भी प्रतिबंध की मांग की

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 26, 2019

नयी दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को ई-सिगरेट पर प्रतिबंध वाले एक विधेयक पर चर्चा के दौरान अधिकतर विपक्षी सदस्यों ने इसके साथ ही संपूर्ण तंबाकू उत्पादों पर भी प्रतिबंध की मांग की, हालांकि सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है क्योंकि इससे करोड़ों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) विधेयक, 2019 चर्चा के लिए रखा। 

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विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार को तंबाकू वाले सिगरेट और ई-सिगरेट में फर्क नहीं करना चाहिए। अगर वह तंबाकू के सेवन पर अंकुश लगाना चाहती है तो उसे सभी तरह के सिगरेट पर पाबंदी लगानी चाहिए। द्रमुक के सेंथिल कुमार ने कहा कि ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बजाय इसे तंबाकू निषेध से जुड़े कानून के दायरे में लाया जा सकता था।उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंध लगाना है तो सभी तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगना चाहिए। बीजू जनता दल की शर्मिष्ठा सेठी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि ई-सिगरेट पर प्रतिबंध से युवाओं को फायदा होगा।वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एम. भरत ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध की पैरवी करते हुए कहा कि युवाओं को ई-सिगरेट का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है और ऐसे में एक युवा होने के नाते वह इस कदम का पूरा समर्थन करते हैं।तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने भी ई-सिगरेट पर प्रतिबंध के कदम का समर्थन किया।एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध की मांग करते हुए सदन में गुटखे का पैकेट दिखाने का प्रयास किया और कहा कि वह इसे जांच के लिए स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को देना चाहते हैं और बताना चाहते हैं कि इस तरह के उत्पाद कितनी आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि आसन से उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली।  भाजपा के जगदंबिका पाल, रवि किशन, बसपा के रितेश पांडे, कांग्रेस के एमके विष्णु प्रसाद, बसपा के मलूक नागर और कई अन्य सदस्यों ने भी इस चर्चा में भाग लिया।

संसद ने राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान संशोधन विधेयक को मंजूरी दी

नयी दिल्ली। संसद ने मंगलवार को राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें अमरावती, भोपाल, जोरहट और कुरुक्षेत्र के राष्ट्रीय डिजाइन संस्थानों (एनआईडी) को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देने का प्रावधान किया गया है। 

लोकसभा में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोमप्रकाश ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अमरावती (आंध्र प्रदेश), भोपाल (मध्य प्रदेश), जोरहट (असम) और कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के राष्ट्रीय डिजाइन संस्थानों (एनआईडी) को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देने का प्रावधान किया गया है ताकि इन संस्थानों के छात्रों को डिग्री प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि हम भारत को डिजाइन के क्षेत्र में केंद्र बनाना चाहते हैं और यह विधेयक इस दिशा में एक प्रयास है। मंत्री के जवाब के बाद तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सौगत राय ने विधेयक में संशोधन की मांग की और एक उपबंध में मध्य प्रदेश की जगह पश्चिम बंगाल करने पर जोर दिया। राय ने इस विषय पर मत विभाजन की मांग की। तृणमूल सांसद का संशोधन 23 के मुकाबले 93 मतों से नामंजूर हो गया।

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