By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 07, 2026
वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा के अधिकारियों से बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन भारत सरकार के अधिकारियों ने पूछताछ की। इस दौरान इंस्टाग्राम के कंटेंट सुझाव संबंधी एल्गोरिद्म और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मेटा के अधिकारियों ने डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), बॉट खातों और कृत्रिम सामग्री से जुड़े मुद्दों को स्वीकार किया और कहा कि कंपनी इनसे निपटने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।
यह बैठक हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाए जाने के बाद सरकार द्वारा भेजे गए समन के संदर्भ में हो रही है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि मेटा के साथ बैठकों का यह दौर तीन से चार दिन तक चलेगा, जिसमें आगे तकनीकी टीम भी सरकार के साथ विस्तृत चर्चा करेगी। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के प्रावधानों का हवाला देते हुए मेटा को चेताया कि यदि वह मध्यस्थ के रूप में अपने दायित्वों का पालन नहीं करती है, तो उसे मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा (कानूनी छूट) खतरे में पड़ सकती है। इससे पहले, बुधवार को हुई बैठक के बाद सरकारी सूत्रों ने बताया था कि मेटा ने प्रधानमंत्री की पोस्ट हटाने की गलती के लिए माफी मांगी थी और साथ ही डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री तथा भुगतान लेकर कुछ कंटेंट को बढ़ावा देने जैसी नाकामियों को भी स्वीकार किया था।
केपलन ने एक लिखित बयान में कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट पर लगे प्रतिबंध की त्रुटि के लिए मंत्री से माफी मांगी। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि मेटा की तरफ से यह माफी कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग की ओर से आई थी। सरकार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मेटा पर्याप्त कदम उठा रही है ताकि उसके मंचों पर अवैध सामग्री को रोका जा सके। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने माना कि उसकी प्रणालियां अभी पूरी तरह सक्षम नहीं हैं और वह सभी अवैध सामग्री को नियंत्रित नहीं कर पा रही है।
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को लगभग पांच घंटे के लिए हटा दिया गया था, जिसे बाद में मेटा ने बहाल करते हुए इसे कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित कंटेंट फिल्टर की गलती बताते हुए माफी मांगी थी। सरकार ने पिछले महीने इंस्टाग्राम पर कथित बाल यौन शोषण सामग्री वाले विज्ञापनों को लेकर भी मेटा को नोटिस जारी किया था। इन बैठकों में एल्गोरिद्म से जुड़े पक्षपात, प्रमुख खातों की सुरक्षा, डीपफेक और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हो रही है।