Meta ने US में 18 अरब डॉलर के समझौते से निपटाया मुकदमा, सुरक्षा नियम बदलेंगे

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026

मेटा और अमेरिका के कई राज्यों के बीच बुधवार को घोषित समझौते से कंपनी के खिलाफ चल रही सबसे बड़ी कानूनी लड़ाइयों में से एक खत्म हो गई। हालांकि, सोशल मीडिया कंपनी को अभी भी युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर उसके उत्पादों के प्रभाव को लेकर अन्य जगहों पर मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। इस समझौते के चलते कैलिफोर्निया के ओकलैंड की संघीय अदालत में चल रहा एक महत्वपूर्ण मुकदमा बीच में ही खत्म हो गया।

ओकलैंड में मुकदमा छह सप्ताह तक चलने की उम्मीद थी, लेकिन दूसरे सप्ताह में समझौते की घोषणा हुई। इसमें ऐसे गवाहों की गवाही होनी थी, जिनमें मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग भी शामिल हो सकते थे। इस मामले में कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटुकी और न्यू जर्सी वादी थे।

ये उन दर्जनों राज्यों में शामिल थे, जिन्होंने तीन साल पहले मेटा के मंचों की डिजाइन और उससे बच्चों को हुए कथित नुकसान को लेकर मुकदमा दायर किया था। अन्य 25 राज्यों में बाद में मुकदमे चलने की उम्मीद थी, लेकिन समझौते के कारण वे मामले भी आगे नहीं बढ़ेंगे। न्यू मैक्सिको उन 48 राज्यों में शामिल नहीं था, जिन्होंने समझौता किया, क्योंकि वह पहले ही मेटा के खिलाफ मुकदमा जीत चुका था।

राज्य ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने जानबूझकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया और अपने मंचों पर बच्चों के यौन शोषण के बारे में उसे जो जानकारी थी, उसे छिपाया। मार्च में जूरी ने राज्य के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हजारों उल्लंघन पाए। अगस्त की शुरुआत में न्यायाधीश ने मुकदमे के दूसरे चरण में मेटा को अपने मंचों से युवाओं को हुए नुकसान के लिए अतिरिक्त 56.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया।

समझौते में शामिल नहीं होने वाला दूसरा राज्य फ्लोरिडा है। वहां के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि समझौता मेटा के लिए पर्याप्त कड़ा नहीं था। अमेरिका में सैकड़ों स्कूल जिलों ने प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं।

वे सोशल मीडिया की लत से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को हुए नुकसान से निपटने में आई लागत की भरपाई की मांग कर रहे हैं। कुछ मुकदमे उन बच्चों और युवाओं के परिवारों ने दायर किए हैं, जिनकी सोशल मीडिया के समस्याग्रस्त इस्तेमाल के बाद आत्महत्या से जान गई। कुछ अन्य मामले ऐसे परिवारों ने दायर किए हैं, जिनके बच्चों की मौत सोशल मीडिया मंचों के जरिए उपलब्ध कराई गई नशीली दवाओं की आकस्मिक अधिक मात्रा से हुई।

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