By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026
(फाइल फोटो के साथ) चेन्नई, 27 अगस्त तमिलनाडु के मंत्री ए. राजमोहन ने बृहस्पतिवार को विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण फंसे राज्य के तीर्थयात्रियों के बचाव कार्य पर करीब से नजर रख रही है और चेन्नई से गए 49 अन्य लोगों की स्थिति का पता भी लगाया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के 10 जिलों से 54 लोग और पुडुचेरी से तीन लोग तीर्थयात्रा पर गए थे। इसके अलावा सरकार को पता चला है कि चेन्नई के एक ‘टूर ऑपरेटर’ ने 49 तीर्थयात्रियों को मानसरोवर भेजा था जिससे तीर्थयात्रा पर जाने वाले लोगों की संख्या 106 हो गई है।
कैलाश यात्रा पर गए तमिल तीर्थयात्रियों से जुड़ी नेपाल की इस दुखद घटना की जानकारी देते हुए राजमोहन ने बताया कि चीन में एक नदी के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर के टूट कर गिरने से नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में जबरदस्त बाढ़ आ गई, जिससे रसुवा, तिमुरे और स्याब्रुबेसी जैसे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए। इस तीर्थयात्रा पर कुल 384 यात्री गए थे जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल थे। इनमें से 75 लोग घायल हुए जबकि 209 लोगों को बचाया गया।
बचाए गए लोगों में से 93 को जमीन के रास्ते और 116 को ‘एयर एंबुलेंस’ के जरिए निकाला गया। इस दौरान वाहनों की आवाजाही के लिए बने 35 पुल, 45 झूला पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। मंत्री ने बताया, ‘‘तीर्थयात्रा पर एक नहीं बल्कि कई समूह गए थे।
पहले समूह में 57 तीर्थयात्री थे जिनमें 54 तमिलनाडु से और तीन लोग पुडुचेरी से थे। ’’ राजमोहन ने बताया कि इनमें से 20 तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक गाड़ी बाढ़ में फंस गई थी लेकिन उन्हें सुरक्षित निकालकर ‘तिमुरे’ इलाके में सशस्त्र पुलिस बल के एक शिविर में पहुंचा दिया गया है और वे सुरक्षित हैं। बाकी सदस्यों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं।
बाद में पता चला कि ‘महादेव कैलाश यात्रा, चेन्नई’ द्वारा भेजा गया 49 तीर्थयात्रियों का एक और समूह भी उसी इलाके में है और अधिकारी उनका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल की सेना, पुलिस और निजी एजेंसियां हेलीकॉप्टर एवं जमीन पर राहत कार्य करने वाली टीम की मदद से बचाव, खोज और राहत कार्य कर रही हैं। मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने मदद के लिए नयी दिल्ली में 24 घंटे उपलब्ध रहने वाले नियंत्रण कक्ष और टोल-फ्री नंबर शुरू किए हैं।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह आपदा जलवायु परिवर्तन और सतत विकास लक्ष्यों के कड़ाई से पालन की जरूरत को लेकर एक “चेतावनी” है।