By Ankit Jaiswal | Mar 20, 2026
देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में इस समय एक नई चुनौती सामने आती दिख रही है, जहां वैश्विक हालात का असर सीधे उत्पादन पर पड़ने लगा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर अब भारत के वाहन उद्योग पर भी नजर आने लगा है।
बता दें कि देश की बड़ी ऑटो कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा से जुड़े कई पुर्ज़ा निर्माता गैस की कमी का सामना कर रहे हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार उत्पादन से जुड़ी इकाइयों में गैस का इस्तेमाल फोर्जिंग, कास्टिंग और पेंटिंग जैसे जरूरी कामों में होता है, ऐसे में इसकी कमी सीधे उत्पादन पर असर डाल सकती है।
गौरतलब है कि भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है, जिसमें कतर की अहम भूमिका रहती है। लेकिन हालिया घटनाओं के चलते वहां उत्पादन और सप्लाई बाधित हुई है। वहीं हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल और गैस आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई।
मौजूद जानकारी के अनुसार ऑटो सेक्टर में फिलहाल उत्पादन पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन कई कंपनियां सीमित क्षमता पर काम कर रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ प्लांट्स अपनी पूरी क्षमता से कम उत्पादन कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
बता दें कि छोटे और मध्यम स्तर के पुर्ज़ा निर्माता इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि वे गैस पर ज्यादा निर्भर रहते हैं और उनके पास वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की सुविधा कम होती है। एक प्रमुख धातु और कास्टिंग कंपनी ने तो गैस की कमी के चलते अपने एक प्लांट में उत्पादन अस्थायी रूप से रोकने का फैसला भी लिया है।
गौरतलब है कि सरकार ने उपलब्ध गैस को प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है, जिससे औद्योगिक इकाइयों को सीमित आपूर्ति मिल रही है। हालांकि भारत अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में यह आसान नहीं दिख रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार ऑटो कंपनियां फिलहाल अपने सप्लायर नेटवर्क के साथ लगातार संपर्क में हैं और उत्पादन को बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उत्पादन और बिक्री दोनों पर असर पड़ सकता है।
बताते चलें कि इस वित्त वर्ष में देश में वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है, ऐसे में किसी भी तरह की सप्लाई बाधा बाजार के संतुलन को बिगाड़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी भारत के ऑटो उत्पादन वृद्धि के अनुमान में कटौती के संकेत दिए हैं, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।