Middle East टेंशन से Stock Market में 'ब्लैक फ्राइडे', निवेशकों के डूबे 19 लाख करोड़

By Ankit Jaiswal | Mar 13, 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। इस सप्ताह बाजार ने पिछले चार वर्षों की सबसे खराब गिरावट दर्ज की है और निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है।

गौरतलब है कि इस गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी को माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें एक बार फिर सौ डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

बाजार बंद होने तक देश के प्रमुख सूचकांक भी तेज गिरावट के साथ बंद हुए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार निफ्टी सूचकांक करीब चार सौ अट्ठासी अंक गिरकर लगभग तेईस हजार एक सौ इक्यावन के स्तर पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में करीब चौदह सौ सत्तर अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग चौहत्तर हजार पांच सौ तिरसठ के आसपास बंद हुआ है।

दोपहर के कारोबार के दौरान भी बाजार में दबाव बना रहा। करीब एक बजे के आसपास निफ्टी लगभग दो प्रतिशत गिरकर तेईस हजार एक सौ नवासी के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि सेंसेक्स में भी करीब सत्रह सौ अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई थी।

बता दें कि बाजार में गिरावट के दौरान धातु, वाहन निर्माण और आधारभूत ढांचा क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में अधिक दबाव देखा गया है। इन क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा गिरावट वाले समूह में शामिल रहे हैं।

गौरतलब है कि तेल की कीमतों के अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बढ़ा रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक पिछले कई दिनों से लगातार शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाजार में कमजोरी बनी हुई है।

हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की ओर से कुछ हद तक खरीदारी जारी रहने के कारण गिरावट और ज्यादा गहरी नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन न मिलता तो बाजार में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती थी।

इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन वाहन, उपभोक्ता वस्तु और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में ज्यादा बिकवाली देखी गई, जबकि कुछ चुनिंदा वस्तु आधारित कंपनियों के शेयरों में हल्की खरीदारी की खबर सामने आई थी।

बता दें कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर आम तौर पर ऊर्जा कीमतों और वित्तीय बाजारों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में स्थिति जल्दी सामान्य नहीं होती है तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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