साक्षात्कारः केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा- भाजपा कोई पारिवारिक पार्टी नहीं है

By डॉ. रमेश ठाकुर | Aug 23, 2021

संसद का मानसून सत्र बेशक हंगामे की भेंट चढ़ा गया हो, रत्ती भर काम भी नहीं हुआ, करोड़ों रुपए पानी में बह गए, बावजूद इसके सत्ता पक्ष उसे बेहतरीन और आमजन के कल्याण को समर्पित बता रहा है। कुछ बिल ऐसे थे जिन्हें केंद्र सरकार ने बिना बहस के पास किए, जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट भी खफा है, तल्ख टिप्पणी भी की है। कोर्ट ने सरकार को चेताते हुए कहा भी है कि बिना विपक्ष के सहयोग से बिल पास नहीं करना चाहिए था। इन्हीं तमाम मसलों को लेकर डॉ. रमेश ठाकुर ने संसदीय कार्य एवं संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से गुफ्तगू की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश-

उत्तर- विपक्षी दल हंगामे की आड़ में अपनी खोई सियासी जमीन तलाशना चाहते हैं। जनता के हितों और उनकी भलाई को लेकर उनके पास कोई विजन नहीं है, उन्हें सिर्फ राजनीति करनी है। दरअसल, जनता का समर्थन उनके पास अब शून्य है। खासकर कांग्रेस के पास। उनकी गलत नीतियां जिसका खामियाजा देश अब भी भुगत रहा है। पंचायत चुनाव से लेकर बड़े चुनावों तक जनता ने तमाम विपक्षी पार्टियों को नकार रखा है। इसलिए संसद में उनकी बौखलाहट इसी बात का परिचायक रही। जनता की भड़ास को वे केंद्र सरकार की सफल योजनाओं और नीतियों की बुराई करके निकालते हैं।

  

प्रश्न- लेकिन संसद का ना चलना भी तो किसी समस्या का कोई हल नहीं?

उत्तर- ये बात विपक्ष को समझनी चाहिए, अपने लिए नहीं, कम से कम देशवासियों की तो परवाह करें। देखिए, मुझे ऐसा लगता है कि मानसून सत्र विपक्ष के तर्कहीन अवरोध के बावजूद भी कई अर्थों में अच्छा रहा। कई उपलब्धियों से भरा रहा। केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और देशवासियों के प्रति प्रधानमंत्री के उत्तरदायित्व के निर्वहन में सफलता प्राप्त करते हुए कई महत्वपूर्ण विधेयक बीते सत्र में पास हुए। सबसे महत्वपूर्ण विधेयक अन्य पिछड़ा वर्ग के हित संरक्षण को लेकर पास हुआ संविधान संशोधन विधेयक रहा। ये बिल कई वर्षों से पेंडिंग था।

प्रश्न- आप किस हिसाब से इस बिल को उपलब्धियों में गिनते हैं?

उत्तर- एक नहीं, बल्कि कई मायनों में खास है। काफी पहले इस बिल को संसद में पास करा देना चाहिए था। अनुसूचित जाति अैर अनुसूचित जनजाति वर्ग की तो सूची है लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची नहीं है, इसलिए इनकी सूची बनाने का और इनका सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक उत्थान करने का कार्य हाथ में लेना है, तो उस समय की सरकार के मुखिया नेहरू ने कहा था कि संविधान लागू होने के बाद एक वर्ष के अन्दर-अन्दर अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जायेगा और इन सारे विषयों को उस आयोग की सिफारिश के अनुसार हल किया जायेगा। पर, ऐसा हो ना सका। ये मसला भी उनकी गलत नीतियों का शिकार हुआ।

प्रश्न- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर क्या रणनीतियां बनाई गई हैं?

उत्तर- भाजपा हमेशा वोट विकास के नाम पर मांगती है। योगी जी के नेतृत्व में यूपी में ऐतिहासिक काम हुए हैं। सपा-बसपा राज में मौज करने वाले आपराधिक किस्म के लोग जेल में हैं। सुरक्षा-सम्मान औरों के मुकाबले बढ़ा है। इसलिए हमें अपने कामों को बताने की जरूरत नहीं, जनता सब जानती है और अभी से तय किया हुआ है कि किसे चुनना है। पूर्ण बहुमत के साथ यूपी में भाजपा वापसी करेगी।

इसे भी पढ़ें: साक्षात्कारः मेजर ध्यानचंद के पुत्र और हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार से ओलंपिक को लेकर बातचीत

प्रश्न- अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग भी बनाया गया था, लेकिन संवैधानिक दर्जा नहीं दिया गया, क्यों?

उत्तर- कई कारण हैं। अव्वल, तो राजनीतिक इच्छाशक्ति का न होना? वैसे आपको बता दूं, मण्डल आयोग की सिफारिश 1990 में तब लागू हुई जब केंद्र में वीपी सिंह सरकार थी और भाजपा बाहर से समर्थन दे रही थी। इस प्रकार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई। उसके बाद 1993 में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन हुआ, किन्तु संवैधानिक दर्जा नहीं दिया गया। वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री बने तब जाकर इस विषय में गम्भीरता आयी। 2018 में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा भी दिया।

प्रश्न- क्या आपको लगता है कि आगामी चुनावों में बढ़ी महंगाई बड़ा मुद्दा बन सकती है?

उत्तर- महंगाई देश में बढ़ी है, इसे हम ईमानदारी से स्वीकार करते हैं। इस मसले पर हमारी पार्टी राजनीति नहीं करेगी। लेकिन सच ये भी है कि महंगाई को कम करने के लिए प्रयास निरंतर जारी हैं। खाद्य तेलों में अगले कुछ दिनों में कीमतें कम होनी शुरू हो जाएंगी। कृषि मंत्री इस बाबत घोषणा कर भी चुके हैं। कोरोना काल में सब चीजें उलट-पुलट हो गई हैं, उन्हें सुधारा जा रहा है।

प्रश्न- क्या यूपी चुनाव मुख्यमंत्री योगी के चेहरे पर लड़ा जाएगा?

उत्तर- देखिए, ऐसे बड़े फैसले पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व सर्वसहमति से लेता है। हमारी पार्टी कोई पारिवारिक पार्टी तो है नहीं जिसमें सिर्फ एक-दो लोग निर्णय लेते हों। रही बात योगीजी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तो इसमें कोई संदेह नहीं है, उनके करिश्माई नेतृत्व ने एक अलग छाप छोड़ी है। बेहतरीन तरीके से प्रशासनिक व्यवस्थाओं को हैंडल किया है। चुनाव में उनका मुख्य चेहरा रहेगा, ये तय है।

-जैसा केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पत्रकार डॉ0 रमेश ठाकुर से कहा।

प्रमुख खबरें

NGOs की Foreign Funding पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, FCRA नियमों के उल्लंघन पर अब लगेगा भारी जुर्माना

Rishabh Pant की Delhi Capitals में घर वापसी, Axar Patel बोले- यह उसका अपना घर है

सत्ता के नशे में CM Bhagwant Mann? Video विवाद को लेकर BJP-Congress ने माँगा Resignation

ICC Ranking Update: Joe Root टॉप Test बल्लेबाज, Jasprit Bumrah और Matt Henry ने साझा किया शीर्ष स्थान!