By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 21, 2026
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के लंबे समय से महासचिव रहे और 1960 के दशक के अंत में एक वामपंथी छात्र कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में कदम रखने वाले दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुए। देश के 23वें राष्ट्रपति चुने जाने से पहले 78 वर्षीय नेता प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे। इसके साथ ही वह मध्य-दक्षिणपंथी विचार वाली बीएनपी के महासचिव की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे।
बीएनपी की स्थापना बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के सात साल बाद हुई थी। मुख्यधारा की राजनीति में आने से पहले आलमगीर सरकारी सेवा में थे। वह 1972 में सिविल सेवा के शिक्षा कैडर में शामिल होकर अर्थशास्त्र के शिक्षक बने।
राजनीति में आने के लिए उन्होंने 1986 में नौकरी छोड़ दी और दो साल बाद अपने गृहनगर ठाकुरगांव से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नगरपालिका अध्यक्ष चुने गए। मुस्लिम लीग के नेता और पूर्वी पाकिस्तान प्रांतीय विधानसभा के पूर्व सदस्य मिर्जा रूहुल अमीन के बेटे आलमगीर 1990 के दशक की शुरुआत में बीएनपी में शामिल हुए थे। बीएनपी में आलमगीर ने दो दशकों के दौरान धीरे-धीरे पार्टी में अपना कद बढ़ाया।
वर्ष 2011 में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने उन्हें कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया और 2016 में उन्हें इस पद की स्थायी जिम्मेदारी सौंप दी गई। वह 2001 में पहली बार संसद सदस्य बने और कृषि राज्य मंत्री तथा नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वह फरवरी 2026 के आम चुनाव में ठाकुरगांव-1 सीट से फिर से चुने गए।
उनकी शादी राहत आरा बेगम से हुई है, जिन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में निजी बीमा कंपनियों में काम किया। उनकी दो बेटियां हैं—एक ऑस्ट्रेलिया में पोस्टडॉक्टोरल फेलो हैं, जबकि दूसरी ढाका के एक स्कूल में अध्यापन का काम करती हैं।