By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 21, 2026
वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने शुक्रवार को बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। लंबे समय से सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के महासचिव रहे आलमगीर को जातीय संसद के कार्यवाहक अध्यक्ष कैसर कमाल ने बंगभवन के दरबार हॉल में पद की शपथ दिलाई। बंगभवन देश के राष्ट्राध्यक्ष का आधिकारिक कार्यालय-सह-आवास है।
बीएनपी के शमीम कैसर लिंकन और प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं, नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री राशिदुज्जमान मिल्लत ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। बीएनपी की स्थायी कमेटी के सदस्य अब्दुल मोइन खान, बांग्लादेश जातीय पार्टी के अध्यक्ष अंदलीव रहमान और बीएनपी सांसद सा चिंग प्रू ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
शपथ ग्रहण समारोह से पहले आलमगीर ने बीएनपी के संस्थापक जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की कब्रों पर जाकर फातिहा पढ़ा। आलमगीर ने अपने प्रतिद्वंद्वी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष एवं जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को हराया था। देश में इस पद के लिए 35 साल में पहली बार हुए चुनावी मुकाबले में 78 वर्षीय आलमगीर ने 255 मत प्राप्त किये थे, जबकि ओली अहमद को 88 मत मिले थे।
यह 1991 के बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए ऐसा पहला चुनाव है, जिसमें मुकाबला हुआ है। इस पद के लिए पिछले कुछ दशकों में आमतौर पर सर्वसम्मति से या निर्विरोध चयन होता रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी सहयोगी मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले पिछले महीने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था।
संविधान के तहत, राष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 90 दिनों के भीतर नये राष्ट्रपति का चुनाव किया जाना आवश्यक है। गत 12 फरवरी को हुए चुनाव में सत्ता में आई बीएनपी के पास वर्तमान में संसद में दो-तिहाई बहुमत है।