अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में सोशल मीडिया का दुरुपयोग फैशन बन गया है: अदालत

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 04, 2025

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री और भारतीय सेना के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा है कि लोगों के कुछ समूहों के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में सोशल मीडिया का दुरुपयोग करना एक फैशन बन गया है।

अदालत ने कहा कि उच्च गणमान्य व्यक्तियों के खिलाफ निराधार आरोप लगाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में सोशल मीडिया का दुरुपयोग करना कुछ लोगों के समूहों के बीच एक फैशन बन गया है।

ऐसे पोस्ट से सौहार्द बिगड़ता है और लोगों के बीच घृणा पैदा होती है। आरोपी अशरफ खान उर्फ निसरत के खिलाफ हाथरस जिले के ससनी पुलिस थाना में बीएनएस की धारा 152 (भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कृत्य) और 197 (राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप और दावे) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आरोप है कि अशरफ खान ने हाल ही में भारत पाकिस्तान के बीच टकराव के दौरान अपनी फेसबुक आईडी पर संपादित वीडियो अपलोड किए। एक पोस्ट में पाकिस्तानी वायुसेना जिंदाबाद कहा गया है और भारतीय विमान को पाकिस्तानी विमान द्वारा मार गिराया जा रहा है। साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अन्य आपत्तिजनक पोस्ट भी किए गए।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उसका मुवक्किल निर्दोष है और आपत्तिजनक पोस्ट उसके द्वारा आगे नहीं बढ़ाए गए, यद्यपि ये पोस्ट उसके मोबाइल में पाए गए।

वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर कथित पोस्ट ने भारत के लोगों के बीच सौहार्द बिगाड़ा और भारतीय सेना और वायुसेना का अपमान भी किया गया। इसलिए याचिकाकर्ता को जमानत देने का आधार नहीं बनता।

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