"भाजपा" के रणनीतिकारों के सामने कई सवाल छोड़ गया एमएलसी चुनाव!

By दीपक कुमार त्यागी | Oct 31, 2026

देश के चार राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक) की 28 विधान परिषद (एमएलसी) सीटों पर चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं, सभी राजनीतिक दल व विश्लेषक परिणामों का अध्ययन करके उसके अपने-अपने लाभ-हानि के हिसाब से मायने निकाल रहे हैं। लेकिन इस बार का यह चुनाव कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनका जवाब राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों के साथ विशेषकर उत्तर प्रदेश के संदर्भ में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को जल्द से जल्द तलाश ना होगा। क्योंकि भाजपा को अन्य दलों से अलग मानते हुए किसी व्यक्ति या परिवार की जागीर की जगह संगठन को सर्वोपरि मानने वाला राजनीतिक दल माना जाता है और वैसे भी अंदरूनी गुटबाजी से दूर अनुशासन वाली पार्टी मानने का दावा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के द्वारा हमेशा सार्वजनिक रूप भी किया जाता है। लेकिन एमएलसी के चुनावों के परिणामों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश की हॉट सीट वाराणसी, लखनऊ व महाराष्ट्र में नागपुर जैसी हाईप्रोफाइल सीट पर हारने के पीछे भाजपा के कुछ राजनेताओं की अति महत्वाकांक्षा व अनुशासन का तार-तार होना बहुत बड़ी वज़ह माना जा रहा है। पहले पार्टी के अधिकांश राजनेता व कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से कार्य करते हुए धरातल पर नज़र आते थे, लेकिन लंबे समय से सत्ता का सुख लगातार भोगने के कारण अब पार्टी के कुछ राजनेताओं का अहंकार अपने चरम पर है और वह सत्ता के मद में चूर होकर के जनता को ठेंगा दिखाकर चिढ़ाते हुए पार्टी के केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व तक के भी दिशा-निर्देशों की आये दिन अनदेखी करने का कार्य कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: विधान परिषद- छोटा चुनाव बड़े सबक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सीट वाराणसी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की सीट लखनऊ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ़ नागपुर के एमएलसी सीटों के इन चुनाव परिणामों के बाद अब पार्टी में ही संगठन की रणनीति और प्रत्याशी चयन पर सवाल उठाने की गुपचुप सुगबुगाहट शुरू हो गई है। वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो हाईप्रोफाइल सीटों के साथ-साथ बाकी सीटों पर भी जीत का अंतर भाजपा के कुछ अपने ही लोगों का भीतरघात, दावेदारों व अन्य जिम्मेदार लोगों के द्वारा सही ढंग से वोट नहीं बनवाने, प्रत्याशी चयन पर सवाल, संगठन के द्वारा बनाई गई जीत की रणनीति और कुछ अपनों के ही द्वारा चुनाव में की गयी चीटिंग की चीख-चीखकर के स्वयं ही पोल खोलने का कार्य रही है।

ऐसी स्थिति में विचारणीय तथ्य यह है कि उत्तर प्रदेश में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव हैं, भाजपा के केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व आये दिन चुनावी रणभूमि के लिए सटीक कारगर रणनीति बनाने के लिए छोटी व बड़ी मीटिंग करते रहते हैं और इन मीटिंग में केंद्रीय व प्रदेश स्तर के नेताओं से लेकर के भाजपा के मंडल स्तर के नेताओं व कार्यकर्ताओं तक की भी मौजूदगी समय-समय पर रहती है, मीटिंग में पार्टी के नेताओं के द्वारा चुनावी रणभूमि के लिए एक चाक-चौबंद रणनीति बनायी जाती है। लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी में अब एक ऐसा लंबा-चौड़ा धड़ा तैयार हो गया है जो मीटिंग के बाद में ईटिंग कर निकलने के बाद से ही गुटबाजी व अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते संगठन सर्वोपरि के भाव का त्याग करके चीटिंग करने में लग जाता है। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में सम्पन्न हुए उत्तर प्रदेश के 11 एमएलसी सीटों के चुनाव भी हैं, इन 11 सीटों में भाजपा 6 सीटें और समाजवादी पार्टी 5 सीटें जीती है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हार के साथ-साथ कुछ सीटों पर तो जैसे-तैसे ही भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है। हालांकि चुनाव परिणामों में दस सीटों पर सिटिंग एमएलसी ही दोबारा चुन लिए गए हैं। केवल लखनऊ स्नातक सीट पर ही बड़ा उलटफेर हुआ है, यहां भाजपा के मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह को सपा की कांति सिंह ने हरा दिया है। वैसे देखें तो वर्ष  2020 में इन सभी 11 सीटों के चुनाव में  भाजपा ने छह, समाजवादी पार्टी ने तीन और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं इस बार भाजपा की सीटें तो छह ही रह गई, लेकिन सपा की सीट तीन से बढ़कर के पांच सीट हो गई हैं। चुनावों के यह परिणाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा में अंदरुनी गुटबाजी और भविष्य में चुनावी रणभूमि में कांटे की टक्कर होने का संकेत दे रहे हैं। जो स्थिति उत्तर प्रदेश में हैट्रिक लगाने का सपना देख रही भाजपा हाईकमान के लिए एक गहन आत्ममंथन का विषय है। हालांकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के चुनावी तरकश में हैट्रिक लगाने के लिए जन अदालत में बताने के लिए कानून व्यवस्था में लेकर के बहुत सारे सरकार के शानदार कार्य हैं, लेकिन इन कार्यों पर पार्टी के कुछ शीर्ष राजनेताओं की अंदरूनी खींचतान, जबरदस्त आपसी गुटबाजी व महत्वकांक्षाएं भारी ना पड़े, इसके लिए समय रहते ही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को ठोस व प्रभावी उपाय धरातल पर करने होंगे।

- दीपक कुमार त्यागी 
अधिवक्ता, स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक

प्रमुख खबरें

Goa Police inspector विकास डेकर पर नाबालिग से दुष्कर्म का केस, महिला सहयोगी भी नामजद

Vitamin B1 Deficiency से जा सकती है याददाश्त, समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति जानलेवा

Asian Champions Trophy: सेमीफाइनल में पहुंच चुकी भारतीय हॉकी टीम रविवार को मलेशिया से भिड़ेगी

Taliban की महिला शिक्षा पाबंदी पर Zakir Naik ने किया बचाव, शुरू हुआ चौतरफा विरोध