जंग के बीच मोदी का बड़ा खेल! अचानक दिल्ली क्यों आ रहे ईरान के विदेश मंत्री?

By अभिनय आकाश | May 08, 2026

मिडिल ईस्ट जल रहा है। अमेरिका और ईरान आमने-सामने खड़े हैं। इजराइल लगातार हमले कर रहा है। इसी बीच बता दें कि एक ऐसा कदम उठा है। एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने पाकिस्तान से लेकर वाशिंगटन तक बेचैनी को बढ़ाकर हलचल मचा दी है। ईरान के विदेश मंत्री और ईरान के उप विदेश मंत्री यह दोनों ही बता दें कि दिल्ली आने की तैयारी कर रहे हैं। यह जल्द ही दिल्ली आने वाले हैं। जंग के बीच में, बारूद के ढेर के बीच में और लगातार सामने आ रही धमकियों के बीच तेहरान ने जिस राजधानी की तरफ अपना रुख किया है, उसका नाम है नई दिल्ली। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार ऐसा क्या है दिल्ली के पास जो पाकिस्तान के पास नहीं है? क्यों पाकिस्तान में अमेरिका, ईरान बातचीत ठंडी पड़ गई, फेल हो गई।  सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ब्रिक्स के जरिए अमेरिका के दबदबे को चुनौती देने की नई पटकथा दिल्ली से लिखी जाए।  यह याद रखिए कि जंग के वक्त देश सिर्फ दोस्त नहीं चुनता बल्कि वो चुनते हैं कि भविष्य किसके साथ दिखना है और इसी वक्त बता दें कि तेहरान का जो कंपास है यह बार-बार दिल्ली की तरफ घूमता दिखाई दे रहा है। 

इसे भी पढ़ें: India-Pak संघर्ष पर बढ़ा-चढ़ाकर दावा करने वाले Trump, Iran ने क्या हाल किया वो क्यों छुपा रहे हैं?

रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। यानी पाकिस्तान पुल बनना चाहता था लेकिन भरोसा हासिल नहीं कर पाया फेल हो गया और तभी ईरान ने भारत के साथ हाई लेवल संपर्क बढ़ा दिया। यही वजह है कि पाकिस्तान को सबसे ज्यादा मिर्ची इस वक्त लगी हुई है। क्योंकि जो रोल इस्लामाबाद अपने लिए देख रहा था वो धीरे-धीरे दिल्ली की तरफ जाता हुआ दिखाई दे रहा है। यह बहुत अहम बात है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईरान ने कई बार भारत से संपर्क बनाए। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाई लेवल बातचीत लगातार हुई। मार्च में हुई बातचीत में ईरान ने यह साफ कहा था कि ब्रिक्स जैसे मंच मौजूदा हालात में वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यानी ईरान सिर्फ सैन्य जवाब नहीं चाहता। वो कूटनीतिक सुरक्षा कवच भी इस वक्त इन हालातों में तलाश रहा है और उसे यह लगता है कि भारत इस पूरे संकट में बैलेंसिंग पावर बन सकता है। अब बैठक में किन-किन मुद्दों पर बातचीत होगी? पहली ब्रिक्स बनाम पश्चिमी दबाव। ईरान यह चाहता है कि ब्रिक्स सिर्फ व्यापारिक मंच ना रहे बल्कि पश्चिमी दबाव के खिलाफ एक रणनीतिक समूह बने। 

इसे भी पढ़ें: Hormuz Crisis | होर्मुज़ संकट का असर! रुपया 45 पैसे लुढ़का, कच्चा तेल $101 के पार- बाज़ारों में हाहाकार

अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाला है और अब तेहरान डॉलर सिस्टम के विकल्प तलाश रहा है और ब्रिक्स उसके लिए सबसे बड़ा प्लेटफार्म बनता जा रहा है। दूसरा चाबहर बनाम गदर। यहां भारतपाकि असली टक्कर छिपी हुई है। एक तरफ चीन पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट है और दूसरी तरफ भारत ईरान का चाबहार पोर्ट। चाबार भारत को पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच देता है। यानी अगर चाबभार मजबूत होता है तो पाकिस्तान का रणनीतिक महत्व बेहद कम हो सकता है। और यही बात इस्लामाबाद को सबसे ज्यादा खटकती है, परेशान करती है। तीसरा मुद्दा तेल, हॉर्मोज और समुद्री सुरक्षा। हॉर्मोज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की धड़कन है। अगर यहां युद्ध बढ़ता है तो पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो सकता है। भारत दुनिया का बड़ा तेल आयातक है और इसीलिए ऊर्जा सुरक्षा इस बैठक का बड़ा एजेंडा हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल वाशिंगटन इस पूरे घटनाक्रम को इतनी गंभीरता से क्यों देख रहा है? क्यों अमेरिका में हलचल है? क्योंकि अमेरिका यह जानता है कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा है। अगर भारत ईरान के साथ संवाद बनाए रखता है तो तेहरान पूरी तरह से अलग-थलग नहीं पड़ेगा। दूसरी बात अगर भविष्य में कोई बैक चैनल बातचीत होती है तो भारत एक अहम पावर ब्रोकर बन सकता है। यानी अमेरिका यह समझ रहा है कि दिल्ली की भूमिका अब सिर्फ दर्शक वाली नहीं रही। 

Stay updated with International News in Hindi (https://www.prabhasakshi.com/international) on Prabhasakshi  

प्रमुख खबरें

सबसे बड़ी Party को मिले मौका, Omar Abdullah ने Actor Vijay के बहाने Supreme Court के निर्देश याद दिलाए

RSS के सबसे बड़े दुश्मन का कैसे हुआ End? आजाद भारत के इतिहास से एक रंग के मिटने की कहानी

जब बढ़ता है Pressure, तब निखरता है मेरा खेल, IPL की चुनौतियों पर खुलकर बोले Krunal Pandya

पदभार संभालते ही एक्शन में Health Minister Nishant Kumar, बोले- ईमानदारी से काम करूंगा