By अभिनय आकाश | Apr 08, 2026
भारत ने वो कर दिखाया है जिसे पश्चिमी देश कहते थे कि यह हो ही नहीं सकता। टेक्नोलॉजिकली यह पॉसिबल ही नहीं है। भारत ने आज बता दें कि इतिहास रच दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम परमाणु परिसर में मौजूद प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यानी कि पीएफबीआर ने क्रिटिकिटी हासिल कर ली है। यानी कि बता दें कि अब यह जो रिएक्टर है यह खुद से न्यूक्लियर रिएक्शन को बनाए रख सकता है। और वो भी बिना किसी बाहरी सहायता के। बता दें कि यह वही मोमेंट है। यह वही पल है जब भारत ने ऑफिशियली अपने थ्री स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में एंट्री कर ली।
बता दें कि कई देशों ने इस प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। लेकिन भारत ने 20 साल की कड़ी मेहनत के बाद और स्वदेशी टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करके और धैर्य के साथ इस मिशन को ना सिर्फ पूरा किया बल्कि इसे सफल भी बनाया। भारत अब कहां पर खड़ा है? उस पर नजर डालते हैं। बता दें कि रूस और भारत के पास ही कमर्शियल स्केल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। यानी भारत जो है वो अब न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के टॉप क्लब में शामिल हो चुका है। तीन स्टेज का यह गेम चेंजर प्लान है। यह सब कुछ बता दें कि यह सब कुछ तब शुरू हुआ था जब महान वैज्ञानिक होमी भाबा के विज़न से इसे शुरू किया गया।