Modi Cabinet ने लिये दो बड़े फैसले, Atal Pension Yojana का किया विस्तार, MSME को सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता भी किया साफ

By नीरज कुमार दुबे | Jan 21, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज दो अहम और दूरगामी फैसले लिए गए जिनका सीधा असर देश के करोड़ों मेहनतकश लोगों और छोटे उद्यमियों पर पड़ेगा। एक ओर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बुढ़ापे की सुरक्षा देने वाली अटल पेंशन योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है वहीं दूसरी ओर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने के लिए स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया को 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता मंजूर की गई है।


कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना को आगे बढ़ाते हुए इसके प्रचार प्रसार, क्षमता निर्माण और विकासात्मक गतिविधियों के लिए सरकारी सहयोग जारी रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही योजना को टिकाऊ बनाए रखने के लिए गैप फंडिंग की व्यवस्था भी जारी रहेगी। हम आपको बता दें कि वर्ष 2015 में शुरू हुई यह योजना 60 वर्ष की आयु के बाद 1000 से 5000 रुपये मासिक पेंशन की गारंटी देती है। जनवरी 2026 तक इस योजना से 8 करोड़ 66 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। सरकार का मानना है कि निरंतर सहयोग से असंगठित क्षेत्र के और अधिक श्रमिकों तक इसका लाभ पहुंचेगा और देश एक पेंशनयुक्त समाज की ओर मजबूत कदम बढ़ाएगा।


वहीं दूसरे बड़े फैसले के तहत स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया को 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी तीन चरणों में दी जाएगी। इसका उद्देश्य बैंक की पूंजीगत स्थिति को मजबूत करना और एमएसएमई क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध कराना है। इस पूंजी निवेश के बाद वर्ष 2028 तक लगभग 25 लाख 74 हजार नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ने की उम्मीद है। मौजूदा औसत के अनुसार इससे करीब 1 करोड़ 12 लाख नए रोजगार सृजित हो सकते हैं। सरकार के अनुसार मजबूत पूंजी आधार से बैंक सस्ती दरों पर संसाधन जुटा सकेगा और छोटे उद्योगों को प्रतिस्पर्धी लागत पर ऋण मिलेगा।


देखा जाये तो आज के ये दोनों फैसले जनहित और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के सूत्र में बँधे हैं। अटल पेंशन योजना का विस्तार यह स्वीकार करता है कि भारत की असली अर्थव्यवस्था आज भी असंगठित क्षेत्र के कंधों पर टिकी है। रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, रेहड़ी पटरी वाले, खेत मजदूर या छोटे कारीगर, इनके लिए बुढ़ापा अक्सर असहायता का दूसरा नाम रहा है। सरकार द्वारा इस योजना को 2030 तक बढ़ाना दरअसल इस वर्ग को यह भरोसा देना है कि काम करने की उम्र बीत जाने के बाद भी जीवन की गरिमा बनी रहेगी।


यह फैसला केवल पेंशन तक सीमित नहीं है। प्रचार और क्षमता निर्माण पर जोर यह संकेत देता है कि सरकार चाहती है कि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी वित्तीय सुरक्षा की भाषा समझे। जब करोड़ों लोग नियमित बचत और पेंशन व्यवस्था से जुड़ते हैं तो यह देश को सामाजिक सुरक्षा के मजबूत ढांचे की ओर ले जाता है। विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब विकास का फल सिर्फ वर्तमान पीढ़ी ही नहीं बल्कि भविष्य की वृद्ध पीढ़ी तक भी पहुंचे।


उधर, स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया को दी गई इक्विटी सहायता भारतीय अर्थव्यवस्था की धड़कन कहे जाने वाले एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा देने वाला कदम है। छोटे उद्योग केवल उत्पादन के केंद्र नहीं होते बल्कि रोजगार के सबसे बड़े स्रोत भी होते हैं। जब बैंक की पूंजी मजबूत होगी तो वह जोखिम उठाने में सक्षम होगा और छोटे उद्यमियों तक बिना जमानत डिजिटल ऋण पहुंचा सकेगा। इससे स्टार्टअप से लेकर पारंपरिक कुटीर उद्योग तक सभी को फायदा मिलेगा।


इस निर्णय का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ेगा। अनुमानित एक करोड़ से अधिक नए रोजगार केवल आंकड़ा नहीं हैं बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिरता का आधार बन सकते हैं। सस्ती और समय पर मिलने वाली पूंजी से छोटे उद्योग न केवल टिकेंगे बल्कि विस्तार भी करेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा, पलायन घटेगा और ग्रामीण व अर्धशहरी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।


बहरहाल, इन दोनों फैसलों को साथ रखकर देखें तो जो तस्वीर उभर कर आती है वह है एक तरफ बुढ़ापे की सुरक्षा की गारंटी और दूसरी तरफ युवाओं और उद्यमियों के लिए अवसरों का विस्तार। यह नीति वर्तमान और भविष्य दोनों को साधने की कोशिश है।

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