Modi Cabinet में Reshuffle और Expansion 5 जुलाई को संभव, कई नये मंत्री बनेंगे, कई पुराने चेहरे बाहर होंगे!

By नीरज कुमार दुबे | Jun 29, 2026

केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हालिया मुलाकातों के बाद यह चर्चा और मजबूत हो गई है कि संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

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महाराष्ट्र इस संभावित फेरबदल का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। शिवसेना में हुए हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और तथाकथित “ऑपरेशन टाइगर” के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट का राजनीतिक वजन बढ़ा है। इसी वजह से शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चाओं में प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसके अलावा ओमराजे निंबालकर, संजय मंडलिक तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि भाजपा अपने सहयोगी दलों को अधिक प्रतिनिधित्व देकर गठबंधन को और मजबूत करना चाहती है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद उन्हें हटाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। शिक्षा मंत्रालय को लेकर हाल के विवादों के कारण धर्मेंद्र प्रधान पर दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है। वहीं कई वरिष्ठ नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी देकर सरकार से बाहर किया जा सकता है। वित्त मंत्रालय को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है। कुछ रिपोर्टों में पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम संभावित वित्त मंत्री के रूप में सामने आया है। प्रशासनिक अनुभव और आर्थिक मामलों की समझ को देखते हुए उन्हें एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है। हालांकि सरकार या भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा संगठन के कुछ बड़े चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल किये जायेंगे और मंत्रिमंडल के कुछ चेहरों को पार्टी संगठन में भूमिका सौंपी जायेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने तीसरे कार्यकाल को नई ऊर्जा और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसी कारण युवा चेहरों, महिलाओं, पिछड़े वर्गों और चुनावी राज्यों के नेताओं को ज्यादा अवसर दिए जाने की संभावना है। भाजपा यह संदेश भी देना चाहती है कि सरकार प्रदर्शन और राजनीतिक जरूरत दोनों के आधार पर फैसले लेती है। सूत्रों के मुताबिक इस फेरबदल का उद्देश्य केवल नए चेहरों को मौका देना नहीं होगा, बल्कि आगामी लोकसभा चुनाव और राज्यों की राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन तथा सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी होगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, बिहार की राजनीतिक स्थिति और महाराष्ट्र में गठबंधन समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा बेहद सावधानी से कदम बढ़ा रही है।

साथ ही भाजपा के “एक व्यक्ति, एक पद” सिद्धांत के तहत उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए गए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी संभालने वाले हर्ष मल्होत्रा के मंत्रिमंडल से बाहर होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं रवनीत सिंह बिट्टू को पंजाब चुनाव पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कह दिया गया है इसीलिए उन्हें इस बार राज्यसभा के लिए दूसरा कार्यकाल नहीं दिया गया। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इन राज्यों से नए प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। साथ ही पश्चिम बंगाल में भाजपा के मजबूत प्रदर्शन के बाद वहां से भी कुछ सांसदों को शामिल किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों तथा आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए कुछ राज्यसभा सदस्यों को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि सरकार से बाहर होने वाले कुछ नेताओं को राज्यपाल की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

हम आपको बता दें कि माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल 5 जुलाई को किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी सेशेल्स दौरे पर हैं, जबकि 6 जुलाई से वह इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने वाले हैं। इससे पहले एक से तीन जुलाई तक जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची भारत दौरे पर रहेंगी इसलिए उस दौरान मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना नहीं है। बताया जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि कई अहम मंत्रालयों में नए चेहरों और नई ऊर्जा की जरूरत है। इसके साथ ही क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण, राज्यों के चुनाव और पार्टी के प्रति निष्ठा जैसे राजनीतिक कारक भी फेरबदल की दिशा तय करेंगे।

बहरहाल, हालांकि अब तक किसी भी संभावित बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही राजनीतिक बैठकों और सहयोगी दलों की बढ़ती सक्रियता ने यह संकेत जरूर दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली को देखते हुए अंतिम फैसला और वास्तविक तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल मंत्रियों के चेहरे बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति और सत्ता संतुलन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा साबित होगा।

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